अध्यापिकाओं को अब नहीं मिलेगी चाइल्ड केयर लीव

प्रतापगढ़ : चाइल्ड केयर लीव लेकर अब अध्यापिकाएं अपने पति के साथ सैर नहीं कर पाएंगी। बच्चों की देखभाल के नाम पर अवकाश लेने वाली अफसरों की बीवियां प्राय: सीसीएल लेकर गायब रहती थीं।
योगी सरकार ने अफसरों की बीवियों पर शिकंजा कसते हुए बुधवार को आदेश जारी कर दिया है।
जिले के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में अधिकांश शिक्षिकाएं ऐसी हैं, जो जिनके पति बड़े अधिकारी हैं। इन अध्यापिकाओं की तैनाती तो स्कूलों में हुई है, मगर वे कागज पर ही नौकरी करती हैं। जुलाई माह में स्कूल खुलते ही बच्चों की देखभाल के लिए सीसीएल अवकाश ले लेती हैं। बच्चे बडे़ होने के  बाद भी यह प्रत्येक वर्ष अवकाश लेकर पति के साथ चली जाती हैं और वेतन ऑनलाइन इनके खाते में पहुंचता रहता है। छह-छह माह के  अंतराल पर यह अवकाश अधिकतम दो वर्ष के लिए मिलता है। मगर अवकाश का यह लेखा-जोखा न तो विद्यालय में होता है और नहीं विभाग के पास होता है। शैक्षिक सत्र समाप्त होते ही पुराने आदेश को फाड़कर फेंक दिया जाता है और नए आदेश को प्रभावी कर दिया जाता है। अध्यापिकाओं के इस खेल का खुलासा होने पर योगी सरकार ने सीसीएल अवकाश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। बुधवार को सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक रमेश कुमार तिवारी का पत्र आते ही बीएसए ने नोटिस बोर्ड पर चस्पा करके आवेदन नहीं करने को कहा है। बीएसए बीएन सिंह ने बताया कि सीसीएल अवकाश के लिए 73 शिक्षिकाओं के आवेदन आए हैं, इनमें बच्चे लेकर आने वाली छह शिक्षिकाओं का अवकाश मंजूर किया गया है। उन्होंने बताया कि अब किसी भी अध्यापिका को सीसीएल अवकाश नहीं दिया जाएगा।

गर्भवती शिक्षिकाओं को मिलने वाले मातृत्व अवकाश पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। मातृत्व अवकाश के तहत शिक्षिकाएं छह माह के अंतराल पर अधिकतम एक वर्ष के लिए अवकाश ले सकती हैं। मगर इसके लिए जांच रिपोर्ट और अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट दिखानी होगी।
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