सुप्रीम कोर्ट की पिछली कई हियरिंग में लगातार बेस-ऑफ़ सलेशन पर ही बहस

सुप्रीम कोर्ट की हियरिंग से अब irritation होने लगी है जज साहब prt में टेट मेरिट को बेस्ट तो मान रहे हैं पर पिछली कई हियरिंग में लगातार बेस-ऑफ़ सलेशन पर ही बहस करा रहे हैं पर फाइनल decision नहीं दे पा रहे हैं। कई इम्पोर्टेन्ट मुद्दे पेंडिंग में ही रह जाते हैं 1 महीने की डेट लगा दी जाती है

फिर से बेसऑफ़ सलेक्शन पर हियरिंग सुरु होती हैं सभी अपने घिसे-घिसाये तर्क प्रस्तुत करते हैं पर बेस ऑफ़ सलेक्शन फाइनल नहीं हो पा रहा है ।
अब सबाल ये है कि कल को बेटेज या अकैडमिक का कोई अच्छा लॉजिक सामने आ गया तो क्या मेरिट का बेस चेंज कर दिया जायेगा हालाँकि ऐसी आशंका ना के बरकार है ।
अब पिछली बार की तरह 105/97 वालों की एक उम्मीद जगी थी अब कि टेट 70% से अधिक ग्रेजुएशन 60 % से अधिक वालों की उम्मीद जगी है कि डेटा ऑनलाइन करके वाकी बची सीट्स दी जायेंगी (आर्डर आने पर ही कन्फर्म होगा )
काफी लोग खुश हुये पर पर ये आर्डर सार्थक कैसे हो पायेगा ??
इसके लिए भर्ती को मूल विज्ञापन के लिए हटाना होगा , चयनितों के लिए अलग नियम वाकी बचे 13000 के अलग नियम कैसे लागू किये जाएंगे ???
जहाँ स्पेशल रिजर्व्ड और ST-SC/OBC फीमेल 90 पर भी चयनित /Graduation mei 60% से कम हैं इनको भी challenge किया जायेगा ।
बहुत सारे पेंच फँस जाएंगे हियरिंग पर हियरिंग चलती रहेगी ।
सुप्रीम कोर्ट में बहुत पॉवर होती हैं अगर कोर्ट चाहे तो रिक्त पदों को देखते हुए RTI का पालन करने के लिए पहले 105/90की काउंसलिंग का आर्डर दे सकता है इसके बाद कट-ऑफ भी कम की जा सकती है पर इन सब पर ध्यान तब जायेगा जब जजसाहब का मोह बेस ऑफ़ सलेक्शन की हियरिंग से कम होगा ।


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