धरने पर शिक्षामित्र, स्कूलों में ताला

जागरण संवाददाता, मैनपुरी : शिक्षामित्रों के धरने से प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। जिन विद्यालयों में केवल शिक्षामित्रों की तैनाती थी, उनमें दो दिन से ताले तक नहीं खुले है। शुक्रवार को भी शिक्षामित्रों ने कलक्ट्रेट के तिकोनिया पार्क में धरना दिया।

कलक्ट्रेट के तिकोनिया पार्क में चल रहा शिक्षामित्रों का धरना कभी भी उग्र हो सकता है। सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित करने की मांग को लेकर बीते दो दिनों से शिक्षामित्र धरना दे रहे हैं। शुक्रवार को अगर बारिश न होती तो शिक्षामित्रों का आंदोलन और उग्र हो सकता था। धरना देने के लिए सुबह से ही पार्क में लगभग छह सैकड़ा से अधिक शिक्षामित्र मौजूद थे। दोपहर तक उन्होंने जमकर नारेबाजी की। इसी दौरान सड़कों पर उतरकर शहर जाम करने की रणनीति भी बनाई। शिक्षामित्र सड़कों पर आने ही वाले थे कि बारिश शुरू हो गई। इसके बाद धरना स्थगित कर दिया गया। दूसरी ओर शिक्षामित्रों के धरने से स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई पर संकट आ गया है। जिले में 169 प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं जिनमें केवल शिक्षामित्रों की ही तैनाती है। इस दौरान इन स्कूलों में ताला भी नहीं खुलता है। वहीं, अन्य स्कूलों में भी शिक्षकों को अकेले ही बच्चों को पढ़ाना पड़ता है। बेसिक शिक्षा विभाग स्कूलों में वैकल्पिक व्यवस्था कराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, लेकिन कोई भी व्यवस्था नहीं हो पा रही है।
लोगों की बात
सरकार ने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए शिक्षामित्रों की भर्ती की थी, लेकिन अब उन्हें अयोग्य ठहराया जा रहा है। जबकि हम लोगों ने शिक्षा के स्तर में काफी सुधार किया है।
सनत पांडेय
हमें सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित किया गया था। अब सरकार कोई बीच का रास्ता निकालना चाहती है, लेकिन हमें सहायक अध्यापक का पद वापस चाहिए।
विनीत प्रताप ¨सह
शिक्षामित्रों ने पूरी मेहनत के साथ स्कूलों में शिक्षण कार्य किया है। इसके बदले में उनकी नौकरी छीन ली गई। जब तक सरकार द्वारा हमारे हित में ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, धरना होता रहेगा।
अजय कुमार
अगर सरकार द्वारा हमें हमारी नौकरी वापस नहीं देती, तब तक हम चुप नहीं बैठेंगे। चाहे जो करना पड़े अपने परिवार के लिए हम अपना हक लेकर रहेंगे।
मनोज देवी
पूरे प्रदेश में लगभग पौने दो लाख शिक्षामित्रों के सामने परिवार का भरण-पोषण करने का संकट खड़ा हो गया है। उनके सामने अब कोई दूसरा चारा नहीं बचा है।
शशिप्रभा
जब तक हमें न्याय नहीं मिल जाता है, हम अपना घर-परिवार छोड़कर धरने पर बैठे रहेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को हमारे हित में फैसला देना चाहिए।

नीलू शाक्य


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