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शिक्षामित्रों का दिल्ली में चल रहा प्रदर्शन खत्म, संगठन फिर कर सकता है सरकार का घेराव

लखनऊ. राजधानी दिल्ली में चल रहा शिक्षा मित्रों का विरोध-प्रदर्शन गुरुवार को खत्म हो गया। शिक्षा मित्रों ने बताया कि केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से बातचीत के बाद हम दोबारा यूपी जाएंगे और राज्य सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करेंगे।
वहीं गुरुवार को शिक्षा मित्रों के नेताओं को दिल्ली पुलिस ने 2 घंटे के लिए हिरासत में, उसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
कुछ नहीं कर सकती केंद्र सरकार
शिक्षा मित्रों के प्रतिनिधियों ने बताया कि मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से मुलाकात हो चुकी है। बातचीत में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि जब तक राज्य सरकार वेतन बढ़ोतरी का प्रस्ताव नहीं देगी, तब तक केंद्र सरकार कुछ नहीं कर सकती। जैसे ही राज्य सरकार कोई उचित कदम उठाती है, केंद्र सरकार उस पर तुरंत विचार कर उचित कार्रवाई करेगी। इसलिए हम दोबारा यूपी जाएंगे और राज्य सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करेंगे।
नहीं होने देंगे पीएम मोदी की रैली
शिक्षा मित्रों के संघ के अध्यक्ष जितेंद्र शाही ने कहा कि अगर शिक्षा मित्रों की मांग पूरी नहीं होती तो बनारस में होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली को नहीं होने दिया जाएगा। हमारा अगला आंदोलन बनारस में ही होगा और वहां मिनी पीएमओ का घेराव किया जाएगा। बीते कई दिनों से राजधानी दिल्ली में धरना दे रहे शिक्षा मित्रों ने बताया कि हमारा विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से खत्म हो गया। शिक्षा मित्रों ने दिल्ली पुलिस को धन्यवाद देते हुए कहा कि हमारे प्रदर्शन में किसी तरह का बल प्रयोग नहीं किया गया। सभी शिक्षा मित्र दिल्ली के जंतर मंतर और संसद मार्ग से अपने-अपने जिलों के लिए रवाना हो गए।
Supreme Court ने रद्द कर दिया है समायोजन
आपको बता दें कि 25 जुलाई, 2017 को Supreme Court ने उत्तर प्रदेश में 1.78 लाख शिक्षा मित्रों के सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन को सिरे से गैरकानूनी ठहराया चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि शिक्षा मित्रों को शिक्षक भर्ती की औपचारिक परीक्षा में बैठना होगा और उन्हें लगातार दो प्रयासों में यह परीक्षा पास करनी होगी। जिसके बाद से शिक्षा मित्र सरकार से समान काम, समान सैलरी का मांग कर रहे हैं। शिक्षा मित्रों का मांग है कि उन्हें TET से छूट देते हुए दोबारा समायोजित किया जाए। शिक्षा मित्रों की मांग है कि केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार कानून में संशोधन करे और उन्हें समायोजित करे। जब तक सरकार उनकी ये मांगें नहीं मानेगी, वह ऐसे ही सड़कों पर प्रदर्शन करते रहेंगे।

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