नई दिल्ली: स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूती देने में जुटी सरकार ने
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के मान्यता देने के नियमों में
बड़ा बदलाव किया है। इसके तहत सीबीएसई अब किसी भी नए स्कूल को मान्यता उसकी
पढ़ाई-लिखाई की गुणवत्ता के आधार पर देगी।
वहीं स्कूलों के
इंफ्रास्ट्रक्चर को जांचने का जिम्मा राज्यों के ऊपर छोड़ दिया गया है।
इसके लिए स्कूलों को जिला शिक्षा अधिकारी से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना
होगा। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने गुरुवार को
सीबीएसई स्कूलों के मान्यता देने के सालों पुराने नियमों में बदलाव की
जानकारी दी। साथ ही बताया कि अभी तक स्कूलों के मान्यता देने की प्रक्रिया
के तहत सीबीएसई और राज्य दोनों ही इंफ्रास्ट्रक्चर की जांच करते थे। ऐसे
में इस पूरी प्रक्रिया में सालों लग जाते थे। जबकि पढ़ाई-लिखाई की गुणवत्ता
को परखने की ओर ध्यान कम था। लेकिन नए नियमों के तहत सीबीएसई अब सिर्फ
स्कूलों के लर्निग आउटकम पर ही फोकस करेगी। इस दौरान वह स्कूलों में
शिक्षकों की योग्यता, उनके प्रशिक्षण, वेतन और प्रयोगशाला आदि की
जांच-पड़ताल करेंगे।
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