उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में 12460 सहायक अध्यापकों की भर्ती से जुड़ा मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस भर्ती में रिक्त रह गई 656 सीटों पर चयन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले अभ्यर्थियों के लिए अब उम्मीद की किरण दिखाई दी है।
🔹 सुप्रीम कोर्ट का अहम निर्देश
29 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि:
👉 भर्ती प्रक्रिया में शामिल अपीलकर्ताओं एवं हस्तक्षेपकर्ताओं की जिलावार मेरिट सूची
👉 उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (शिक्षक) सेवा नियमावली, 1981 के अनुसार तैयार कर
👉 न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाए
यह निर्देश उन अभ्यर्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो वर्षों से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
🔹 मेरिट निर्धारण को लेकर कोर्ट की स्पष्टता
सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि:
-
मेरिट का निर्धारण
-
15 दिसंबर 2016 को जारी विज्ञापन की तिथि
-
के आधार पर ही किया जाएगा
कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि मेरिट सूची प्रस्तुत होने के बाद अभ्यर्थियों की ज्वॉइनिंग को लेकर उचित आदेश पारित किए जा सकते हैं।
🔹 नौ साल से इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों में जगी उम्मीद
इस आदेश से:
✔️ लगभग 9 वर्षों से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों में नई उम्मीद जगी है
✔️ 656 रिक्त सीटों पर नियुक्ति की संभावना मजबूत हुई है
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को 18 मार्च तक मेरिट सूची प्रस्तुत करने का समय दिया है, ताकि आगे की कार्रवाई पर विचार किया जा सके।
🔹 12460 शिक्षक भर्ती का पूरा घटनाक्रम
-
📌 15 दिसंबर 2016 – 12460 शिक्षक भर्ती का विज्ञापन जारी
-
📌 16 मार्च 2017 – पहले चरण की काउंसिलिंग
-
📌 1 मई 2018 – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने
👉 51 जिलों के 6512 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए
इसके बाद सैकड़ों सीटें रिक्त रह गईं, जिन पर चयन को लेकर विवाद चलता रहा।
🔹 क्या हो सकता है अगला कदम?
विशेषज्ञों के अनुसार:
-
यदि मेरिट सूची नियमों के अनुरूप पाई जाती है
-
तो सुप्रीम कोर्ट
👉 656 रिक्त पदों पर नियुक्ति का रास्ता साफ कर सकता है
यह फैसला भविष्य में लंबित शिक्षक भर्तियों के लिए भी महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
🔹 निष्कर्ष
12460 सहायक अध्यापक भर्ती से जुड़ा यह आदेश:
-
लंबित भर्तियों में न्याय की उम्मीद
-
और वर्षों से संघर्ष कर रहे अभ्यर्थियों के लिए
👉 एक बड़ा सकारात्मक संकेत है
अब सबकी नजरें 18 मार्च को प्रस्तुत होने वाली मेरिट सूची और सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश पर टिकी हैं।