लखनऊ। विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में 45 दिन या उससे अधिक अवधि के लिए किए गए अस्थाई (टेम्पररी) पदों पर शिक्षकों व कर्मचारियों की भर्ती में अब आरक्षण का पूरा हिसाब लिया जाएगा। वर्ष 2023 से 2025 के बीच हुई भर्तियों की जांच के निर्देश जारी किए गए हैं।
यह निर्देश University Grants Commission (UGC) की ओर से सभी विश्वविद्यालयों और संबद्ध डिग्री कॉलेजों को भेजे गए हैं।
📌 क्या हैं प्रमुख निर्देश?
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45 दिन या उससे अधिक अवधि के अस्थाई पदों पर आरक्षण नियमों का सख्त पालन अनिवार्य।
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OBC, SC और ST वर्ग के अभ्यर्थियों को नियमानुसार आरक्षण लाभ सुनिश्चित किया जाए।
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2023–2025 के बीच हुई अस्थाई भर्तियों का विस्तृत ब्योरा तलब।
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संस्थानों से भर्ती प्रक्रिया, रोस्टर और चयन संबंधी रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा गया है।
🎯 क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?
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अस्थाई नियुक्तियों में आरक्षण लागू न होने की शिकायतें मिल रही थीं।
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लंबी अवधि की अस्थाई नियुक्तियाँ व्यवहार में स्थायी जैसी भूमिका निभाती हैं।
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सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करना उद्देश्य।
🏫 संस्थानों पर क्या असर?
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विश्वविद्यालयों/कॉलेजों को अपने रोस्टर रजिस्टर और चयन प्रक्रिया की समीक्षा करनी होगी।
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भविष्य की अस्थाई भर्तियों में पारदर्शिता और अनुपालन बढ़ेगा।
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नियमों के उल्लंघन पर जवाबदेही तय हो सकती है।
निष्कर्ष
UGC के इस निर्देश से उच्च शिक्षा संस्थानों में अस्थाई भर्तियों की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और आरक्षण-समर्थ बन सकती है। अब 2023–2025 के बीच की नियुक्तियों की जांच से स्थिति स्पष्ट होगी और आगे के लिए सख्त अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।