सुप्रीम कोर्ट से यूपी के 25,000 अनुदेशक शिक्षकों को बड़ी राहत: नौकरी सुरक्षित, वेतन ₹17,000 प्रति माह

उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों में कार्यरत अनुदेशक या संविदा शिक्षक लंबे समय से वेतन वृद्धि और नौकरी की सुरक्षा की मांग कर रहे थे। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस संघर्ष को बड़ी जीत में बदल दिया है, जिससे लगभग 25,000 से अधिक शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित हो गई है और उनके वेतनमान में भी वृद्धि की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि संविदा शिक्षक की नियुक्ति को केवल संविदा न मानते हुए इसे नौकरी के रूप में जारी रखा जाए। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि वर्षों तक लगातार कार्य करने वाले शिक्षकों को अचानक से नौकरी से हटाया नहीं जा सकता।


💼 संविदा शिक्षक अब सिर्फ कामगार नहीं

कोर्ट ने माना कि यदि कोई शिक्षक संविदा के आधार पर लंबे समय तक काम कर रहा है और उसे काम से अलग करने का कोई वैध कारण नहीं है, तो उसे नौकरी से हटाया नहीं जा सकता। इस फैसले के बाद शिक्षकों की सेवाएं जारी रहेंगी और उन्हें सम्मानजनक वेतन भी मिलेगा।


💰 ₹17,000 मासिक वेतन

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जो शिक्षक पहले कम वेतन पर कार्यरत थे, उन्हें अब ₹17,000 प्रतिमाह वेतन मिलेगा। पुराने न्यून वेतन को “अनुचित श्रम व्यवहार” माना गया। इस फैसले के तहत:

  • नया वेतन ₹17,000 प्रतिमाह होगा

  • यह वेतन 2017–18 से प्रभावी माना जाएगा

  • भुगतान 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा

  • पुराने बकाया वेतन छह माह के भीतर चुकाया जाएगा


📢 संविदा शिक्षकों के लिए महत्व

यह फैसला ऐतिहासिक इसलिए है क्योंकि:

✔️ हजारों संविदा शिक्षकों को नौकरी से निकाले जाने का डर खत्म हुआ
✔️ वेतनमान में बड़ी वृद्धि हुई
✔️ संविदा नियुक्तियों को स्थायी कराने जैसा लाभ मिला
✔️ लंबे समय से चली आ रही मांगों को न्याय मिला


🧑‍🏫 शिक्षकों में खुशी की लहर

अनुदेशक शिक्षकों और उनके परिवारों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को महत्वपूर्ण और सकारात्मक बदलाव के रूप में स्वीकार किया है। यह फैसला न केवल उनकी आजीविका की सुरक्षा करेगा, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे लोगों के सम्मान को भी बढ़ाएगा।


🍁 निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय उत्तर प्रदेश के संविदा शिक्षकों के लिए बड़ी न्यायिक जीत है। इससे न केवल उनकी नौकरी सुरक्षित हुई है, बल्कि उन्हें उचित और स्थिर वेतनमान भी मिलेगा। यह निर्णय शिक्षा क्षेत्र में रोजगार सुरक्षा और शिक्षक सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।