📌 मुख्य समाचार: प्राथमिक शिक्षक समायोजन-3 मामले में रोक 26 फरवरी तक बढ़ी

 Uttar Pradesh के बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी समायोजन-3 (Adjustment-3) आदेश के खिलाफ याचिकाओं पर इलाहाबाद हाईकोर्ट, लखनऊ खंडपीठ ने कार्यवाही रोक दी है और इस रोक को अब 26 फरवरी 2026 तक बढ़ा दिया है।

🔹 कोर्ट ने मामले की अंतिम सुनवाई भी इसी तारीख 26 फरवरी को निर्धारित की है।
🔹 यह रोक समायोजन/स्थानांतरण-3 शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर लागू होगी।
🔹 याचिकाकर्ता शिक्षकों का दावा है कि यह शासनादेश आरटीई अधिनियम और बेसिक शिक्षा अधिनियम-1972 के नियमों का उल्लंघन करता है।
🔹 शिक्षकों ने तर्क दिया है कि इसमें उनकी सहमति के बिना समायोजन किया गया है, जिससे वरिष्ठता और छात्र-शिक्षक अनुपात प्रभावित होता है।


🧑‍🏫 समायोजन-3 क्या है?

समायोजन-3 वह प्रक्रिया है जिससे बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत प्राथमिक शिक्षकों के स्थानांतरण और पद नियोजन संबंधी नीति लागू होती है।
यह तब आता है जब विभाग शिक्षकों को विभिन्न विद्यालयों में आवश्यकतानुसार पुनर्व्यवस्थित करना चाहता है। लेकिन कुछ शिक्षकों ने यह नीति स्वेच्छा के विरुद्ध लागू होने का दावा किया है, और इसीलिए मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा है।


⚖️ कोर्ट की भूमिका

📍 इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने:

  • शासनादेश पर आगे की कार्यवाही को रोक दिया है

  • याचिकाकर्ताओं से लिखित बहस दाखिल करवाने की अनुमति दी है

  • रोक को 26 फरवरी 2026 तक के लिए बढ़ाया है

  • और इस बीच विभाग को कोई कार्यवाही नहीं करने का आदेश दिया है


🗣️ शिक्षकों की मुख्य आपत्तियाँ

शिक्षकों का कहना है कि:

✔ शासनादेश में उनकी सहमति का कोई सम्मान नहीं है
✔ इससे वरिष्ठता के नियम प्रभावित हुए हैं
✔ समायोजन नीति विज्ञानिक और व्यावहारिक नहीं है

यह मामला लाखों प्राथमिक शिक्षक कर्मचारियों के पेशेवर भविष्य से जुड़ा है, इसलिए इसे बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है।


📍 अधिकारी प्रक्रिया अभी जारी

अब कोर्ट की अगली सुनवाई 26 फरवरी 2026 को होगी, जब इस मामले पर फाइनल बहस सुनी जाएगी और संभवतः स्थायी निर्णय आएगा।


क्या आप चाहेंगे कि मैं इस निर्णय का प्रभाव शिक्षकों और सरकारी भर्ती पर विस्तार से समझाऊं (जैसे: नौकरी, स्थानांतरण, वरिष्ठता, और कोर्ट के फैसले का मतलब)?