प्रयागराज। उत्तर प्रदेश सरकार ने सैम हिगिनबॉटम यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज (SHUATS) से हटाए गए 53 शिक्षकों की सेवाओं को पुनः बहाल करने का आदेश जारी किया है। पिछले वर्ष
वित्तीय कारणों और कुछ विभागों को बंद करने के आधार पर इन शिक्षकों की नियुक्तियां रद्द कर दी गई थीं, लेकिन अब शासन ने इस निर्णय को संशोधित करते हुए उन्हें पुनः नियुक्त करने का निर्देश दिया है।🔹 हटाए जाने के कारण
पिछले साल विश्वविद्यालय ने 10 विभागों को वित्तीय संकट के कारण बंद किया था, जिसके परिणामस्वरूप 53 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। शिक्षकों ने इस निर्णय के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी और कहा था कि नियुक्तियों में नियमों का पालन नहीं किया गया।
🔹 जांच समिति की सिफारिश
सरकार ने विवाद सुलझाने के लिए चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने पर्याप्त सहयोग नहीं दिया और नियुक्तियों के अभिलेखों में पारदर्शिता की कमी थी। इसी के आधार पर शासन ने शिक्षकों की सेवाओं को बहाल करने का आदेश दिया।
🔹 शासनादेश में क्या निर्णय लिया गया?
सरकार ने निर्देश दिए हैं कि:
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हटाए गए 53 शिक्षकों को तत्काल पुनः नियुक्त किया जाए
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उनकी पहले की शैक्षणिक सेवाओं का वेतन भुगतान किया जाए
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विभाग संबंधित दस्तावेजों और अभिलेखों का सत्यापन सुनिश्चित करे
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अन्य प्रभावित शिक्षक भी विभाग की नीति के अनुसार लाभान्वित हों
इससे विश्वविद्यालय में नियमों के पालन और शिक्षा विभाग की नीतियों का सम्मान सुनिश्चित होगा।
🔹 विश्वविद्यालय का रुख
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि मामला अदालत में विचाराधीन है, लेकिन शासन ने तत्काल कदम उठाते हुए शिक्षकों की सेवा बहाल करने का आदेश दिया। इससे विवाद का तात्कालिक समाधान हो सकेगा।
🔹 शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए संदेश
इस आदेश के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि:
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सरकार न्यायपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ रही है
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नियमों और प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया जाएगा
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गलत तरीके से हटाए गए शिक्षकों को न्याय मिलेगा
शिक्षा विभाग ने सभी शिक्षकों से अनुरोध किया है कि वे समय पर आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण प्रदान करें ताकि पुनर्नियुक्ति और वेतन भुगतान प्रक्रिया में देरी न हो।
🔹 निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्णय शिक्षा जगत में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इससे शिक्षक समुदाय में न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है और प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का संदेश भी गया।