📋 स्थायी BLO ड्यूटी — व्यवस्था की चूक और शिक्षक को सज़ा...

 📋 स्थायी BLO ड्यूटी — व्यवस्था की चूक और शिक्षक को सज़ा...

शुरुआत में कहा गया था कि BLO की ड्यूटी कुछ दिनों की होगी…

लेकिन आज हाल यह है कि तारीख़ पर तारीख़ बढ़ती जा रही है और शिक्षक कक्षा छोड़कर फील्ड में भटक रहा है। 🏫➡️🏠

मतदाता परेशान हैं,

BLO परेशान हैं,

और सिस्टम… बस आदेश जारी कर रहा है।

हाल ही में SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) के बाद नोटिसों की बाढ़ आ गई।

लोग पूछ रहे हैं — “हमने क्या ग़लत किया?”

सच ये है — ग़लती आज की नहीं, 2003 की व्यवस्था की है।

🔍 नोटिस क्यों आ रहे हैं?

क्योंकि आज वोटर की जानकारी को 2003 की मतदाता सूची से जोड़ा जा रहा है — जिसे कहते हैं मैपिंग।

अगर खुद का नाम उस सूची में नहीं है, तो माता-पिता या दादा-दादी से लिंक किया जा रहा है।

लेकिन समस्या यहाँ है 👇

2003 में डेटा मैन्युअल फॉर्म से कंप्यूटर में डाला गया था —

जहाँ नामों की अंग्रेज़ी स्पेलिंग, सरनेम और उम्र में भारी गड़बड़ियाँ हुईं।

आज वही गलतियाँ “Logical Discrepancy” बनकर मतदाता के दरवाज़े पर नोटिस बनकर पहुँच रही हैं।

📌 जैसे –

* नाम बदल गया (Ram → Ram Das)

* उम्र का अंतर सिस्टम को ग़लत लग रहा है

* एक ही व्यक्ति से कई लोगों की मैपिंग

* दादा-दादी, माता-पिता और वोटर के बीच उम्र का गणित बिगड़ा हुआ

गलती सिस्टम की,

भुगतान मतदाता का,

और अपशब्द झेलने वाला… BLO शिक्षक। 😔

अब सारा काम एक ही BLO ऐप में डाल दिया गया है।

पहले जिम्मेदारी बाँटी जाती थी,

अब सारा बोझ एक ही शिक्षक पर।

जो पहले से ही अपने विभाग की जिम्मेदारियाँ निभा रहा है।

🙏 अब समय आ गया है

कि निर्वाचन आयोग और प्रशासन

BLO का स्थायी पद बनाए,

ताकि चुनावी प्रक्रिया भी सही हो

और बच्चों की पढ़ाई भी बचे।

क्योंकि शिक्षक को हर बार

व्यवस्था की कमियों की सज़ा देना

न्याय नहीं है। ✍️

C/P

#teachers_pain 😢

#शिक्षक_की_पीड़ा

#BLO_Duty