📢 टीईटी छूट की मांग को लेकर शिक्षक संघ ने दिया दिल्ली मार्च का ऐलान

 उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने Ayodhya में एक बैठक में कहा है कि यदि 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट नहीं दी जाती है, तो सभी शिक्षक नई दिल्ली की ओर मार्च (कूच) करेंगे। संघ के जिलाध्यक्ष नीलमणि त्रिपाठी ने यह चेतावनी दी।

🔹 शिक्षक संघ का कहना है कि टीईटी की अनिवार्यता से उन पुराने शिक्षकों की नौकरी खतरे में है, जिन्हें नियुक्ति के समय यह परीक्षा अनिवार्य नहीं थी।
🔹 संघ का आरोप है कि सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने अभी तक पुराने शिक्षकों के लिए छूट देने में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
🔹 इस कारण संघ ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो वह दिल्ली की ओर पैदल मार्च या विशाल रैली करेंगे।


📌 टीईटी विवाद का मूल कारण क्या है?

टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) को भारत में प्राथमिक और जूनियर स्तर के सरकारी शिक्षकों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के रूप में लागू किया गया है। हालांकि यह नियम बाद में लागू हुआ, लेकिन इससे पहले नियुक्त उन शिक्षकों को भी इसका पालन करना पड़ रहा है जिनके पास अनुभव खूब है।

यूपी के लगभग लाखों शिक्षक इस फैसले से चिंतित हैं क्योंकि:

  • उन्हें टीईटी परीक्षा में सफल होना होगा

  • अगर वे समय पर पास नहीं करते हैं, तो सेवा में बाधा आ सकती है

  • संघ मांग कर रहा है कि 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को इस नियम से छूट दी जाए।


📅 विरोध का स्वरूप

शिक्षकों ने विरोध कार्यक्रमों की रूपरेखा तय कर ली है जिसमें शामिल हैं:
✔ 23–25 फरवरी तक काली पट्टी बांधकर कक्षा संचालन
✔ 26 फरवरी को जिला मुख्यालयों पर धरना
✔ मार्च के अंत में दिल्ली में विशाल रैली/मार्च
✔ सोशल मीडिया पर अभियान और ज्ञापनों की मांगें भेजना


📊 क्यों यह मुद्दा गरमाया है?

यह आंदोलन इसलिए भी व्यापक चर्चा में है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के टीईटी अनिवार्यता आदेश ने इस विषय को और जटिल बनाया है, और कई शिक्षक अपनी नौकरी को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।