फतेहपुर सीकरी में टीईटी नियम के विरोध में शिक्षक मार्च: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गरमाई शिक्षा राजनीति

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सीकरी में सरकारी शिक्षकों ने Teacher Eligibility Test (TET) को हर सेवा निर्णय — जैसे पदोन्नति, स्थानांतरण तथा वेतन वृद्धि — में अनिवार्य मानने के नियम का कड़ा विरोध किया है। शिक्षकों के आक्रोश ने विरोध मार्च और धरने का रूप ले लिया, जिसमें उन्होंने अपनी मांगों को नعرों और नाराज़गी के साथ प्रशासन तथा सरकार तक पहुंचाया।

यह विरोध केवल एक स्थानीय आंदोलन नहीं है, बल्कि शिक्षा नीति की दिशा और शिक्षक अधिकारों के मसले पर चल रही बहस का एक महत्वपूर्ण प्रदर्शन है।


🔹 विरोध की मुख्य वजह

शिक्षक समुदाय का विवाद मुख्य रूप से TET के नाम पर लागू नियमों के कारण है, जिसके तहत अब न केवल नियुक्ति बल्कि:
✔ पदोन्नति
✔ स्थानांतरण
✔ कैरियर ग्रोथ
जैसे महत्वपूर्ण सेवाओं में भी TET अनिवार्यता मान लिया गया है।
शिक्षकों का तर्क है कि यदि वे वर्षों से सेवा दे रहे हैं और उनके पास अनुभव, योग्यता तथा वरिष्ठता है, तो केवल TET के कारण निर्णयों को प्रभावित करना अन्यायपूर्ण और अनुचित है।

उनका कहना है कि TET को प्रारंभिक नियुक्ति तक सीमित रखना चाहिए, न कि सेवा के हर चरण में लागू करना चाहिए।


🔹 शिक्षकों की प्रमुख मांगें

धरना-मार्च में शामिल शिक्षकों ने स्पष्ट रूप से अपनी मांगें रखीं:

📌 टीईटी अनिवार्यता को केवल पहली नियुक्ति तक सीमित किया जाए
📌 सेवाओं, प्रमोशन और स्थानांतरण में इसका बाध्यकारी उपयोग न किया जाए
📌 अनुभवी शिक्षकों के अनुभव और वरिष्ठता को प्राथमिकता मिले
📌 शिक्षण कार्यकर्ता नीतियों की समीक्षा और सुधार प्रक्रिया में शिक्षकों को शामिल किया जाए

शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं हुआ, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।


🔹 सुप्रीम कोर्ट फ़ैसले और शिक्षकों का भरोसा

शिक्षकों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मकसद TET की भूमिका को स्पष्ट करना था, न कि इसे सभी सेवाओं में बाध्यता बनाना। उनका तर्क है कि यदि नीति का दुरुपयोग किया जाएगा, तो इससे अनुभवी शिक्षकों का अधिकार प्रभावित होगा और शिक्षा व्यवस्था में असंतुलन पैदा होगा।

इसलिए शिक्षक चाहते हैं कि नीतिगत फैसलों को न्याय, अनुभव, वरिष्ठता और संतुलन के आधार पर लिया जाए।


🔹 प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया

स्थानीय प्रशासन तथा शिक्षा विभाग ने माना है कि शिक्षकों की चिंता गंभीर है और सभी पक्षों को ध्यान से सुना जाएगा। सरकार ने संकेत दिया है कि वे TET, पदोन्नति नियम और अन्य सेवा निर्णयों की समीक्षा करने के लिए विशेष समीक्षा बैठक बुला सकते हैं।

हालांकि फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, परंतु यह स्पष्ट है कि सरकार इस मुद्दे पर संवाद और समाधान दोनों का रास्ता तलाश रही है।


🔹 विवाद का शिक्षा व्यवस्था पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षक आंदोलन केवल नौकरी की माँग नहीं है, बल्कि यह शिक्षा नीति, सेवा सुरक्षा और न्याय के मुद्दों को उजागर करता है। यदि शिक्षक समुदाय की चिंताओं का समाधान संतुलित तरीके से नहीं हुआ, तो इसके प्रभाव शिक्षा व्यवस्था तथा शिक्षक-छात्र रिश्ते पर पड़े सकते हैं।

✔ अनुभवी शिक्षकों का मनोबल प्रभावित हो सकता है
✔ गलत नीतियाँ शिक्षा गुणवत्ता पर असर डाल सकती हैं
✔ नीति विरोधी माहौल शिक्षा विभाग में तनाव पैदा कर सकता है

ऐसे में नीति निर्माण के दौरान सभी हितधारकों को शामिल करना आवश्यक है।


🔹 निष्कर्ष

फतेहपुर सीकरी में टीईटी नियम के खिलाफ शिक्षक विरोध मार्च ने यह संदेश दिया है कि शिक्षक केवल नियमों को पालन करने वाले कर्मचारी नहीं, बल्कि शिक्षा तंत्र के केंद्रबिंदु हैं। उनकी आवाज़ और उनकी चिंताओं को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।

सरकार और नीति निर्माताओं के लिए यह समय है कि वे संवाद, समीक्षा और संतुलन के साथ नीतियाँ बनाएं ताकि शिक्षक, छात्र और शिक्षा गुणवत्ता — तीनों के हित सुरक्षित रहें।