इलाहाबाद हाईकोर्ट: तदर्थ प्रधानाचारियों को प्रधानाचार्य वेतन का हक नहीं | Education News UP

 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तदर्थ और कार्यवाहक प्रधानाचारियों के वेतन अधिकार को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नए अधिनियम में तदर्थ प्रधानाचारियों के लिए कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए उन्हें प्रधानाचार्य पद का वेतन देय नहीं होगा


🔹 1982 के अधिनियम की धारा 18 का पालन आवश्यक

कोर्ट ने कहा कि 1982 के अधिनियम की धारा 18 में उल्लिखित पूर्व-शर्तों का पालन करना अनिवार्य है। केवल उन शर्तों के पूरा होने के बाद ही कोई तदर्थ पदोन्नत व्यक्ति प्रधानाचार्य पद के वेतन का हकदार होगा

  • पहले नियुक्त तदर्थ प्रधानाचारियों से वेतन की वापसी नहीं की जाएगी

  • इस आदेश की तिथि के बाद किसी भी तदर्थ प्रधानाचार्य को वेतन नहीं दिया जाएगा

यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने समिता सहित कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया।


🔹 सभी याचिकाएं निस्तारित

कोर्ट ने याचिकाओं को निस्तारित करते हुए निर्देश दिए कि:

  • संबंधित डीआईओएस हर मामले के तथ्य जांचेंगे

  • यदि रिक्ति अधिसूचित नहीं की गई थी, तो तदर्थ प्रधानाचार्य वेतन का हकदार नहीं होगा

  • ऐसे मामलों में कॉलेज चार सप्ताह के भीतर रिक्ति अधिसूचित करेगा


🔹 नए नियम लागू: उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन नियमावली 2023

कोर्ट ने यह भी कहा कि:

  • UP Education Service Selection Rules 2023 लागू हो गए हैं।

  • 1982 का अधिनियम अब निरस्त हो चुका है।

  • 1921 के अधिनियम और उसके नियमों के तहत तदर्थ प्रधानाचार्य को वेतन देने का कोई प्रावधान नहीं है

इसलिए अब तदर्थ प्रधानाचारियों के वेतन पर कानूनी परिणाम लागू होंगे


🔹 निष्कर्ष

यह आदेश यह स्पष्ट करता है कि:

  • तदर्थ प्रधानाचारियों को स्वचालित वेतन का अधिकार नहीं है।

  • नए नियमावली और अधिनियम के तहत कॉलेजों को रिक्तियों का सही तरीके से संचालन करना होगा।

  • शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए यह आदेश स्पष्ट दिशा निर्देश देता है।