नई दिल्ली। केंद्र सरकार गिग और प्लेटफॉर्म आधारित कर्मियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) को अनिवार्य करने पर विचार कर रही है।
इस पहल का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों को बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।👷♂️ क्यों जरूरी है यह कदम?
पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित रोजगार तेज़ी से बढ़ा है।
-
ड्राइवर
-
डिलीवरी पार्टनर
-
फ्रीलांसर
-
ऐप आधारित सेवा प्रदाता
इनमें से अधिकांश कर्मचारी पारंपरिक पेंशन या भविष्य निधि (PF) के दायरे में नहीं आते। ऐसे में उन्हें नियमित पेंशन व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।
💰 अंशदान मॉडल पर मंथन
सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि NPS में योगदान कैसे तय किया जाए। संभावित मॉडल:
✔ कर्मचारी का अंशदान
✔ प्लेटफॉर्म कंपनी का योगदान
✔ सरकार की साझेदारी
हालांकि अंतिम निर्णय अभी लंबित है। उद्योग जगत का मानना है कि कंपनियों पर संभावित अतिरिक्त वित्तीय बोझ का आकलन आवश्यक होगा।
📱 डिजिटल पंजीकरण होगा आसान
गिग वर्कर्स को NPS से जोड़ने के लिए:
-
आधार आधारित सत्यापन
-
मोबाइल ऐप के माध्यम से डिजिटल रजिस्ट्रेशन
-
UPI उपयोगकर्ताओं के लिए वन-क्लिक NPS खाता खोलने की सुविधा
जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, ताकि प्रक्रिया सरल और सुलभ हो।
🔄 ऑटो-एनरोलमेंट और APY की समीक्षा
सरकार ऑटो-एनरोलमेंट मॉडल पर भी विचार कर रही है, जिससे श्रमिक स्वतः योजना में शामिल हो सकें।
साथ ही Atal Pension Yojana (APY) की भी समीक्षा होगी। वर्तमान में APY के लगभग 86 मिलियन पंजीकृत ग्राहक हैं, लेकिन सक्रिय योगदानकर्ताओं की संख्या करीब 50% ही बताई जाती है।
🏦 NPS क्या है?
National Pension System (NPS) एक दीर्घकालिक रिटायरमेंट निवेश योजना है, जिसमें नियमित अंशदान से रिटायरमेंट के बाद पेंशन और एकमुश्त राशि प्राप्त होती है। यह बाजार आधारित रिटर्न और दीर्घकालिक कंपाउंडिंग का लाभ प्रदान करती है।
📌 निष्कर्ष
यदि NPS को गिग और प्लेटफॉर्म कर्मियों के लिए लागू किया जाता है, तो यह असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम होगा। इससे भविष्य में नियमित पेंशन, आर्थिक स्थिरता और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।