Teacher Post Approval Case: शिक्षक पद मानक संशोधन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, महाराष्ट्र सरकार को नोटिस | Latest SC News

 

शिक्षक पद स्वीकृति मानदंड पर सुप्रीम कोर्ट का अहम कदम, महाराष्ट्र सरकार को नोटिस

नई दिल्ली से आई बड़ी खबर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने छात्र संख्या के आधार पर शिक्षक पदों की स्वीकृति के मानदंडों में संशोधन से जुड़े मार्च 2024 के सरकारी आदेश (GR) को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया है

यह आदेश न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने दिया।


🔹 किसकी याचिका पर हुई सुनवाई?

यह याचिका सिंधुदुर्ग जिला शिक्षण संस्था चालक मंडल द्वारा दाखिल की गई है।
कोर्ट ने इस मामले में:

  • महाराष्ट्र राज्य सरकार

  • शिक्षा आयुक्त

  • अन्य संबंधित अधिकारियों

को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।


🔹 क्या है विवाद का मुख्य मुद्दा?

याचिका में कहा गया है कि 15 मार्च 2024 को जारी सरकारी आदेश (GR) के जरिए:

  • प्राथमिक

  • उच्च प्राथमिक

  • माध्यमिक विद्यालयों

में छात्रों की संख्या के आधार पर शिक्षक पद स्वीकृत करने के नियमों में बदलाव किया गया।

याचिकाकर्ता का दावा है कि यह आदेश शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), 2009 की मूल भावना और नीति के पूरी तरह विपरीत है।


🔹 RTE Act के उल्लंघन का आरोप

याचिका में स्पष्ट कहा गया है कि:

RTE अधिनियम के अनुसार विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात (PTR) तय करने में कक्षा को इकाई माना जाना चाहिए,
जबकि नए सरकारी आदेश में पूरे अनुभाग (Primary / Upper Primary / Secondary) को इकाई माना गया है।

इसका सीधा परिणाम यह होगा कि:

  • जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या कम है

  • वहां कई कक्षाओं के लिए सिर्फ एक शिक्षक स्वीकृत होगा

जो शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर असर डाल सकता है।


🔹 याचिकाकर्ता की प्रमुख आपत्तियां

  • एक शिक्षक पर कई कक्षाओं का बोझ

  • RTE Act 2009 के प्रावधानों की अनदेखी

  • ग्रामीण व छोटे विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित

  • शिक्षकों और छात्रों – दोनों के अधिकारों का हनन


🔹 सुप्रीम कोर्ट का रुख क्यों अहम है?

✅ शिक्षक-छात्र अनुपात पूरे देश का संवेदनशील मुद्दा
✅ अन्य राज्यों की नीतियों पर भी असर पड़ सकता है
✅ RTE Act की व्याख्या पर स्पष्टता मिलेगी

इस मामले का फैसला देशभर की शिक्षक भर्ती और पद स्वीकृति नीति को प्रभावित कर सकता है।


🔹 आगे क्या?

  • महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल करेगी

  • कोर्ट यह तय करेगा कि सरकारी आदेश RTE Act के अनुरूप है या नहीं

  • आवश्यकता पड़ी तो आदेश पर रोक या संशोधन के निर्देश भी संभव


🔹 निष्कर्ष

शिक्षक पदों की स्वीकृति से जुड़ा यह मामला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट की दखल से अब इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट दिशा तय होने की उम्मीद है।