उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी का ऐलान किए जाने के बीच कुछ शिक्षकों के वेतन में सैलरी रिकवरी की तैयारी भी शुरू हो गई है।
यह खबर शामली जिले से सामने आई है, जहाँ लेखा विभाग ने नियमों के उल्लंघन के आधार पर कुछ मामलों की जांच की है।🆕 मानदेय में वृद्धि – पूरे प्रदेश में लागू
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शिक्षामित्रों का मानदेय पहले ₹10,000 था, जिसे अब ₹18,000 प्रतिमाह कर दिया गया है।
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अनुदेशकों को भी मानदेय बढ़ाकर ₹17,000 प्रतिमाह किया गया है।
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यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी और इसका लाभ प्रदेश के लगभग 1.4-1.5 लाख शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को मिलेगा।
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सरकार ने साथ ही ₹5 लाख तक का कैशलेस मेडिकल इलाज की सुविधा भी घोषित की है।
शिक्षामित्रों और अनुदेशकों ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे उनके आर्थिक हालात में सुधार के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया है।
🔍 शामली में सैलरी रिकवरी की तैयारी
हालाँकि राज्य स्तर पर मानदेय वृद्धि की खुशी है, शामली जिले में ऐसा मामला सामने आया है जहाँ लेखा विभाग ने 14 शिक्षकों की सैलरी रिकवरी की तैयारी शुरू कर दी है।
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ये शिक्षक बाहरी जनपदों से अपनी इच्छानुसार दूसरे जनपद में ट्रांसफर होकर तैनात हुए थे।
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उस समय उनका पदोन्नत वेतनमान ठीक से काटा नहीं गया, जिससे वर्तमान में उन्हें अतिरिक्त वेतन मिलता रहा।
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लेखा विभाग ने यह गड़बड़झाला पहचाना और अब इस अतिरिक्त भुगतान को काटकर रिकवरी प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
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इनमें कैराना ब्लॉक, कांधला ब्लॉक, शामली ब्लॉक और ऊन ब्लॉक के शिक्षक शामिल हैं।
📌 क्या है वजह?
शिक्षा विभाग के नियमों के मुताबिक किसी शिक्षक के ट्रांसफर के दौरान पदोन्नत वेतन का लाभ तभी मिलता है जब संबंधित प्रक्रिया pee protection और प्रमोशन-सरेन्डर से सही तरीके से पूरी हो।
शामली में लेखा विभाग ने पाया कि कुछ मामलों में यह प्रक्रिया नियम अनुसार नहीं अपनाई गई थी, जिससे वेतन में अनियमितता रह गई। यही वजह है कि अब उन शिक्षकों से अतिरिक्त वेतन की रिकवरी की तैयारी हो रही है।
📝 निष्कर्ष
📌 प्रदेश में शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का मानदेय 80% तक बढ़ा कर उन्हें आर्थिक मजबूती देने की कोशिश की जा रही है, लेकिन साथ ही भर्ती और वेतन भुगतान की प्रक्रिया की पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन भी तवज्जो दे रहा है।
➡️ मानदेय वृद्धि से अधिकांश शिक्षामित्रों को लाभ मिलेगा, लेकिन गलत तरीके से वेतन पाने वाले कुछ मामलों में रिकवरी की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है, जो प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में है।