देवरिया। परिषदीय विद्यालयों में कान्वेंट की तर्ज पर पढ़ाई की शुरुआत करते
हुए नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य दिया गया था। कुल 50 हजार नए नामांकन के
सापेक्ष जिले में महज 4860 हजार ही नए बच्चों को नामांकन हो पाया।
स्कूलों
की कुल संख्या पर गौर करें तो नामांकन का यह आंकड़ा प्रति विद्यालय दो
बच्चों का है। जिले में तमाम ऐसे भी स्कूल हैं, जहां बच्चों की संख्या
पिछले वर्ष के सापेक्ष कम हो गई है। ड्रेस, बैग, जूता-मोजा, किताब-कॉपी
सहित अन्य सुविधाएं और पूरा सरकारी तंत्र लगाने के बाद भी बच्चों का
नामांकन नहीं बढ़ना शिक्षा व्यवस्था के खामियों की पोल खोल रहा है।
अप्रैल
से शुरू हुए नए शिक्षण सत्र में जिले को 50 हजार नए नामांकन का लक्ष्य
दिया गया था। सरकार का दावा था कि आधुनिक सुविधाओं के कारण बच्चे और
अभिभावक परिषदीय स्कूलों की ओर आकर्षित होंगे। शिक्षकों को घर-घर जाकर
बच्चों को बुलाने की जिम्मेदारी दी गई थी। कोई भी बच्चा नामांकन से वंचित
नहीं रहने देने का स्पष्ट निर्देश दिया है। 30 सितंबर तक चली नामांकन
प्रक्रिया के बावजूद जिले में महज 4860 नए नामांकन ही हुए। इसमें भी 1728
बच्चे प्राथमिक और 3132 पूर्व माध्यमिक के हैं। पिछले सत्र में जिले में
कुल नामांकन दो लाख 48 हजार 879 छात्र संख्या थी। इस सत्र में सितंबर माह
तक दो लाख, 29 हजार 739 छात्रों के नामांकन हुए हैं। यानी पिछले साल से
केवल चार हजार से कुछ अधिक ही नामांकन हुए हैं। इस अनुसार जिले के कुल 2615
परिषदीय स्कूलों को मिला दें तो इस सत्र में प्रति स्कूल केवल दो छात्रों
की संख्या ही बढ़ी है।
नामांकन से भी कम स्कूलों में उपस्थिति
नामांकन
में हुई वृद्धि की जमीनी हकीकत भी कागजों से बिल्कुल अलग है। स्कूलों में
बच्चों की उपस्थिति नामांकन से बेहद कम मिल रही है। खुद अफसरों के निरीक्षण
में भी इसकी कलई खुल चुकी है। बीएसए ने 13 अक्तूबर को जिले के एक दर्जन से
अधिक स्कूलों का निरीक्षण किया गया था। इसमें भलुअनी विकास खंड के बढ़या
फुलवरिया पूर्व माध्यमिक विद्यालय में कुल नामांकन 29 पाए गए और मौके पर
मात्र चार छात्र उपस्थित मिले। चार अक्तूबर को बैतालपुर के इमिलिहा तिवारी
टोला के निरीक्षण में 50 नामांकन के सापेक्ष महज चार, पूर्व माध्यमिक स्कूल
में कुल 27 नामांकन के सापेक्ष मौके पर 14, सदर क्षेत्र के प्राथमिक
विद्यालय मुंडेरा बुजुर्ग के निरीक्षण में नामांकन 61 के सापेक्ष मौके पर
केवल 20 छात्र मौजूद मिले। शेष बच्चे क्यों नहीं आ रहे, इसका जवाब शिक्षकों
के पास नहीं था।
बढ़ाकर दिखाते हैं नामांकन
प्रधान से मिलीभगत
कर प्रधानाध्यापक नामांकन संख्या को अधिक दर्शाते हैं। हर बार निरीक्षण में
नामांकन के सापेक्ष कम छात्रों के होने से इस बात की पोल खुलती है। शासन
से प्रति छात्र कन्वर्जन कास्ट के रुप में 4.13 रुपये प्राथमिक स्तर के
प्रति छात्र एवं 6.18 रुपये प्रति छात्र के हिसाब से मिड-डे मील कराने के
लिए धन आता है। कन्वर्जन कास्ट में हिस्सा पाने के लिए नामांकन को बढ़ाने
का खेल किया जाता है।
1877 जिले में प्राथमिक विद्यालय।
738 उच्च प्राथमिक विद्यालय।
6500 से अधिक शिक्षक हैं जिले में तैनात।
3031 शिक्षामित्र हैं जिले में।
सत्र
के शुरुआत में ही शिक्षकों को स्कूल चलो अभियान की रैली निकालकर नामांकन
बढ़ाने का निर्देश दिया जाता है। सितंबर माह तक चले नामांकन में पिछले साल
के सापेक्ष जिले में चार हजार से अधिक छात्रों का नामांकन हुआ है। हालांकि
यह लक्ष्य से कम है। अगले सत्र में लक्ष्य को पूरा करने की पूरी कोशिश
होगी।
-माधवजी तिवारी, बीएसए, देवरिया।
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