लखनऊ : डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा में वर्ष 2011 से 2014 के बीच तीन हजार से अधिक लोगों को बीएड के फर्जी अंक पत्र बांटने के साक्ष्य मिलने के साथ ही कुछ बड़े लोगों की भूमिका भी उजागर हुई है।
जांच एजेंसी एसआइटी की नजर इन पर टिकी है। एसआइटी के एडीजी महेंद्र मोदी ने साक्ष्य संकलन पर जोर दिया है।1सूत्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ बड़े नाम भी अब जांच के दायरे में आ रहे हैं। जुलाई तक जांच पूरी करनी है। इसलिए संकेत मिले हैं कि जल्द ही एजेंसी विश्वविद्यालय प्रशासन के कुछ जिम्मेदार लोगों से पूछताछ कर सकती है। इस मामले में कुलसचिव प्रभात रंजन की भूमिका पर जांच टीम केंद्रित है। मध्यप्रदेश और बाहर के कई अभ्यर्थियों को फर्जी अंक पत्र उपलब्ध कराए गए। इसमें भी कई जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका सामने आई है। विश्वविद्यालय के बीएड प्रभारी रणवीर सिंह ने भी पहले कुछ लोगों के नाम बताए थे, लेकिन तब साक्ष्य नहीं मिल रहे थे। पिछले दिनों छापेमारी में मिले साक्ष्यों ने जांच टीम की मुश्किलें आसान कर दी हैं। अभी तक इस मामले में ज्यादातर कर्मचारी और छात्र ही आरोपी बनाए गए हैं।

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जांच एजेंसी एसआइटी की नजर इन पर टिकी है। एसआइटी के एडीजी महेंद्र मोदी ने साक्ष्य संकलन पर जोर दिया है।1सूत्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ बड़े नाम भी अब जांच के दायरे में आ रहे हैं। जुलाई तक जांच पूरी करनी है। इसलिए संकेत मिले हैं कि जल्द ही एजेंसी विश्वविद्यालय प्रशासन के कुछ जिम्मेदार लोगों से पूछताछ कर सकती है। इस मामले में कुलसचिव प्रभात रंजन की भूमिका पर जांच टीम केंद्रित है। मध्यप्रदेश और बाहर के कई अभ्यर्थियों को फर्जी अंक पत्र उपलब्ध कराए गए। इसमें भी कई जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका सामने आई है। विश्वविद्यालय के बीएड प्रभारी रणवीर सिंह ने भी पहले कुछ लोगों के नाम बताए थे, लेकिन तब साक्ष्य नहीं मिल रहे थे। पिछले दिनों छापेमारी में मिले साक्ष्यों ने जांच टीम की मुश्किलें आसान कर दी हैं। अभी तक इस मामले में ज्यादातर कर्मचारी और छात्र ही आरोपी बनाए गए हैं।

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