अभी तक अपने नाम और स्कूल से पहचाने जाने वाले शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी आने दिनों में इम्पलाई कोड से पहचाने जाएंगे। इसके लिए शिक्षकों से डाटा फार्म भरवाया जा रहा है। ताकि शिक्षकों की ई-सर्विस बुक तैयार कर उन्हें इम्पलाई कोड दिया जा सके।
स्कूलों का डाटा ऑनलाइन होने के बाद बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग सभी शिक्षकों का डाटा ऑनलाइन करने में जुटा हुआ है। मकसद है कि स्कूलों के कोड की ही तरह शिक्षकों को भी एक यूनीक कोड दिया जाए। इस कोड को क्लिक करते ही शिक्षक से जुड़ी सारी सूचना कंप्यूटर स्क्रीन पर आ जाएगी।
इसके लिए शिक्षकों से एक प्रोफार्मा भरवाया जा रहा है। इस प्रोफार्मा में शिक्षक की सर्विस बुक से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण सूचनाएं दर्ज होंगी। साथ ही शिक्षक का शैक्षिक रिकार्ड भी दर्ज रहेगा। इसके आधार पर ही ई-सर्विस बुक तैयार हो जाएगी।
पहले चरण में राजकीय और एडेड कालेजों का डाटा तैयार किया जा रहा है। डीआईओएस गजेंद्र कुमार ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार डाटा र्फींडग का काम कराया जा रहा है। पहले चरण का काम जुलाई तक पूरा होने की उम्मीद है।

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स्कूलों का डाटा ऑनलाइन होने के बाद बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग सभी शिक्षकों का डाटा ऑनलाइन करने में जुटा हुआ है। मकसद है कि स्कूलों के कोड की ही तरह शिक्षकों को भी एक यूनीक कोड दिया जाए। इस कोड को क्लिक करते ही शिक्षक से जुड़ी सारी सूचना कंप्यूटर स्क्रीन पर आ जाएगी।
इसके लिए शिक्षकों से एक प्रोफार्मा भरवाया जा रहा है। इस प्रोफार्मा में शिक्षक की सर्विस बुक से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण सूचनाएं दर्ज होंगी। साथ ही शिक्षक का शैक्षिक रिकार्ड भी दर्ज रहेगा। इसके आधार पर ही ई-सर्विस बुक तैयार हो जाएगी।
पहले चरण में राजकीय और एडेड कालेजों का डाटा तैयार किया जा रहा है। डीआईओएस गजेंद्र कुमार ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार डाटा र्फींडग का काम कराया जा रहा है। पहले चरण का काम जुलाई तक पूरा होने की उम्मीद है।

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