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शिक्षकों की भर्ती में फर्जीवाड़े की गंध

 संवाद सहयोगी, हाथरस : सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति के लिए कई माह पूर्व शासन स्तर पर बैठे अधिकारियों ने ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। जिले में दो सौ पदों के सापेक्ष विगत दिनों काउंस¨लग करा ली गई। तमाम आवेदकों ने गलत तरीके से फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिये आवेदन कर दिए गए।

उस विश्वविद्यालय के प्रमाण-पत्रों को अब बारीकी से जांच पड़ताल कमेटी के स्तर से करायी जा रही है।
बेसिक शिक्षा विभाग में अनुदेशकों की नियुक्ति की बात हो या सहायक अध्यापक के पद पर तैनाती होनी हो। तमाम अभ्यर्थी फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी पाने की जुगाड़ में लगे रहते हैं। पूर्व में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी पाने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई बीएसए के स्तर से करायी जा चुकी है। वहीं, अनुदेशकों के चयन के बाद भी फर्जी प्रमाण-पत्र मेघालय के एक विश्वविद्यालय के लगा दिए गए, जिन्हें बाद में निरस्त कर दिया गया था और उनकी काउंसलिंग नहहीं करायी गई थी।
अक्टूबर में 15 हजार सहायक अध्यापक की भर्ती शासन स्तर पर बैठे अधिकारियों ने निकाली थी। ऑनलाइन आवेदन अभ्यर्थियों से मांगे गए थे। इसमें बाद में कोर्ट से रोक लग गई। विगत दिनों काउंसलिंग कराने के निर्देश जारी कर दिए गए। जिला हाथरस में 15 हजार के सापेक्ष दो सौ पद स्वीकृत थे। विज्ञप्ति जारी कराकर बीएसए रेखा सुमन ने कमेटी की सहमति से काउंसलिंग करा ली। चयन सूची का इंतजार पात्र अभ्यर्थी कर रहे है, लेकिन बताते हैं कि काउंस¨लग कराने वाले तमाम अभ्यर्थी ऐसे हैं, जो अधिक अंक रखते हैं, लेकिन उनके प्रमाण पत्रों को देखकर चयन कमेटी भी दंग है। कमेटी में अध्यक्ष के अलावा जीजीआइसी प्रधानाचार्य,डीएम द्वारा नामित प्रवक्ता और बीएसए सदस्य बतौर है। अनुदेशकों की नियुक्ति के समय करीब दो दर्जन से अधिक आवेदन मेघालय के विश्वविद्यालय के पकड़ में आए थे।
इनकी सुनो
चयन कमेटी का निर्णय अंतिम होगा। प्रमाण-पत्रों की जांच पड़ताल करायी जा रही है। उसी के बाद कुछ तय हो पाएगा कि प्रमाण सही है या नहीं।

-हरवंश ¨सह, डायट प्राचार्य, हाथरस।
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