लखनऊ शिक्षक दिवस के दिन यूपी से माध्यमिक के 11 शिक्षकों को राष्ट्रपति
पुरस्कार के लिए चयनित किए जाने पर विवाद हो गया है। माध्यमिक शिक्षक संघ
ने आरोप लगाया है कि ये सभी पुरस्कार खरीदे हुए हैं। इस खेल में डीआईओएस
उमेश त्रिपाठी से लेकर शिक्षा निदेशक अमरनाथ वर्मा तक शामिल है।
गुरुवार को क्वींस इंटर कॉलेज में प्रेस वार्ता में संगठन के प्रदेश मंत्री आरपी मिश्रा ने बताया कि शिक्षकों के चयन के लिए 80 अंक उनके प्रोफाइल और 20 अंक इंटरव्यू से देने थे, लेकिन इस बार इंटरव्यू के अंक 50 कर उन्हें चयनित कर लिया। इसके विरोध में हम पीएम और एमएचआरडी के पत्र लिखेंगे और शिक्षक दिवस पर इसका विरोध करेंगे।
शिक्षकों से आवेदन लेना ही गलत
माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश मंत्री आरपी मिश्रा ने कहा कि पुरस्कार के लिए शिक्षकों से आवेदन मांगा जाना ही गलत है। केंद्र सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक, शिक्षकों से न तो पुरस्कार के लिए आवेदन के लिए कहा जाएगा और न ही इसकी अनुमति उनसे ली जाएगी। यह गोपनीय होगा। जबकि यहां पहले चरण में शिक्षकों से ही जिला समिति ने आवेदन मांगे। यह बात लखनऊ से चयनित होने वाले दो शिक्षक फजील अहमद और वंदना तिवारी भी स्वीकारते हैं।
पुरस्कार से शिक्षकों को है लाखों का फायदा
राष्ट्रपति पुरस्कार पाने से हर शिक्षकों को लाखों का फायदा होता है। दरअसल, पुरस्कार के साथ ही माध्यम से ऐडेड कॉलेज के शिक्षक को तीन साल और राजकीय कॉलेज के शिक्षकों को पांच साल का सेवा विस्तार भी मिलता है। ऐसे में हर शिक्षकों को बीस से तीस लाख रुपये का फायदा होता है।
यह है प्रक्रिया
चयन के लिए पहले जिला समिति जिसमें डीआईओएस अध्यक्ष होते हैं शिक्षकों के प्रपोजल राज्य समिति को भेजते हैं। यह प्रपोजल शिक्षकों के सेवाकाल के रेकार्ड के आधार पर दिए जाते है, जिसमें कई बिंदुओं पर उन्हे परखा जाता है। इसके बाद राज्य समिति जिसमें शिक्षा निदेशक अध्यक्ष हैं शिक्षकों का चयन करती है।
गुरुवार को क्वींस इंटर कॉलेज में प्रेस वार्ता में संगठन के प्रदेश मंत्री आरपी मिश्रा ने बताया कि शिक्षकों के चयन के लिए 80 अंक उनके प्रोफाइल और 20 अंक इंटरव्यू से देने थे, लेकिन इस बार इंटरव्यू के अंक 50 कर उन्हें चयनित कर लिया। इसके विरोध में हम पीएम और एमएचआरडी के पत्र लिखेंगे और शिक्षक दिवस पर इसका विरोध करेंगे।
शिक्षकों से आवेदन लेना ही गलत
माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश मंत्री आरपी मिश्रा ने कहा कि पुरस्कार के लिए शिक्षकों से आवेदन मांगा जाना ही गलत है। केंद्र सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक, शिक्षकों से न तो पुरस्कार के लिए आवेदन के लिए कहा जाएगा और न ही इसकी अनुमति उनसे ली जाएगी। यह गोपनीय होगा। जबकि यहां पहले चरण में शिक्षकों से ही जिला समिति ने आवेदन मांगे। यह बात लखनऊ से चयनित होने वाले दो शिक्षक फजील अहमद और वंदना तिवारी भी स्वीकारते हैं।
पुरस्कार से शिक्षकों को है लाखों का फायदा
राष्ट्रपति पुरस्कार पाने से हर शिक्षकों को लाखों का फायदा होता है। दरअसल, पुरस्कार के साथ ही माध्यम से ऐडेड कॉलेज के शिक्षक को तीन साल और राजकीय कॉलेज के शिक्षकों को पांच साल का सेवा विस्तार भी मिलता है। ऐसे में हर शिक्षकों को बीस से तीस लाख रुपये का फायदा होता है।
यह है प्रक्रिया
चयन के लिए पहले जिला समिति जिसमें डीआईओएस अध्यक्ष होते हैं शिक्षकों के प्रपोजल राज्य समिति को भेजते हैं। यह प्रपोजल शिक्षकों के सेवाकाल के रेकार्ड के आधार पर दिए जाते है, जिसमें कई बिंदुओं पर उन्हे परखा जाता है। इसके बाद राज्य समिति जिसमें शिक्षा निदेशक अध्यक्ष हैं शिक्षकों का चयन करती है।
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