एटा : समाजवादी पार्टी का पांच सदस्यीय विधान परिषद सदस्यों का प्रतिनिधि मंडल यहां एसएसपी से मिला। सपा नेताओं ने मांग की कि शिक्षामित्रों पर लगीं संगीन धाराएं हटाई जाएं और जेल में जो शिक्षामित्र घायल हैं
उनके उपचार की समुचित व्यवस्था की जाए।
सपा नेताओं की बात सुनकर एसएसपी ने निष्पक्षता के बाद कार्रवाई का भरोसा दिया और कहा कि शिक्षामित्र अगर शांतिपूर्ण तरीके से रहें तो मांगों पर विचार किया जा सकता है। इस बीच संयुक्त शिक्षामित्र संघर्ष समिति द्वारा 18 सितंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन स्थगित कर दिया गया।
सपा के विधान परिषद सदस्य असीम यादव, संजय लाठर, राजपाल शाक्य, उदयवीर सिंह, डॉ. दिलीप यादव एसएसपी अखिलेश कुमार चौरसिया से मिलने उनके आवास पर पहुंचे, जहां एडीएम प्रशासन सतीशपाल भी मौजूद थे। सपा नेताओं ने एसएसपी से मांग की कि जो संगीन धाराएं शिक्षामित्रों पर लगाईं गईं हैं उन्हें हटा लिया जाए, ताकि उन्हें शीघ्र जमानत मिल सके। नेताओं ने शिक्षामित्रों का पक्ष रखते हुए कहा कि जो महिलाएं जेल भेजी गईं हैं उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं, जो परेशान हैं।
शिक्षामित्र पुलिस के डर के साए में जी रहे हैं। उनके घरों पर इस तरह दबिश दी जा रहीं हैं कि मानो वे बड़े अपराधी हों। अगर धारा 307 जैसी संगीन धाराएं हटा ली जाएंगी तो आंदोलनकारियों को 21 सितंबर को होने वाली सुनवाई के दौरान जमानत मिल सकती है।
जिन 500-600 लोग अज्ञातों की एफआइआर दर्ज हैं उसके आधार पर पुलिस किसी भी शिक्षामित्र को उठाकर बंद करने की कोशिश कर रही है, वे घरों से भागे हुए हैं। आंदोलन वाले दिन जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि महिलाओं को जेल नहीं भेजा जाएगा, लेकिन फिर भी उन्हें जेल भेज दिया गया। सपा के सदस्यों ने कहा कि शिक्षामित्रों पर कुल 13 धाराएं लगाईं गईं हैं।

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उनके उपचार की समुचित व्यवस्था की जाए।
सपा नेताओं की बात सुनकर एसएसपी ने निष्पक्षता के बाद कार्रवाई का भरोसा दिया और कहा कि शिक्षामित्र अगर शांतिपूर्ण तरीके से रहें तो मांगों पर विचार किया जा सकता है। इस बीच संयुक्त शिक्षामित्र संघर्ष समिति द्वारा 18 सितंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन स्थगित कर दिया गया।
सपा के विधान परिषद सदस्य असीम यादव, संजय लाठर, राजपाल शाक्य, उदयवीर सिंह, डॉ. दिलीप यादव एसएसपी अखिलेश कुमार चौरसिया से मिलने उनके आवास पर पहुंचे, जहां एडीएम प्रशासन सतीशपाल भी मौजूद थे। सपा नेताओं ने एसएसपी से मांग की कि जो संगीन धाराएं शिक्षामित्रों पर लगाईं गईं हैं उन्हें हटा लिया जाए, ताकि उन्हें शीघ्र जमानत मिल सके। नेताओं ने शिक्षामित्रों का पक्ष रखते हुए कहा कि जो महिलाएं जेल भेजी गईं हैं उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं, जो परेशान हैं।
शिक्षामित्र पुलिस के डर के साए में जी रहे हैं। उनके घरों पर इस तरह दबिश दी जा रहीं हैं कि मानो वे बड़े अपराधी हों। अगर धारा 307 जैसी संगीन धाराएं हटा ली जाएंगी तो आंदोलनकारियों को 21 सितंबर को होने वाली सुनवाई के दौरान जमानत मिल सकती है।
जिन 500-600 लोग अज्ञातों की एफआइआर दर्ज हैं उसके आधार पर पुलिस किसी भी शिक्षामित्र को उठाकर बंद करने की कोशिश कर रही है, वे घरों से भागे हुए हैं। आंदोलन वाले दिन जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि महिलाओं को जेल नहीं भेजा जाएगा, लेकिन फिर भी उन्हें जेल भेज दिया गया। सपा के सदस्यों ने कहा कि शिक्षामित्रों पर कुल 13 धाराएं लगाईं गईं हैं।

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