वाराणसी : संपूर्णानंद में अध्यापकों की नियुक्ति को लेकर पेच फंस गया है। राजभवन ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों से यूजीसी के नए नियम के तहत अध्यापकों की नियुक्ति करने व यूजीसी गाइडलाइन का पालन करने के लिए परिनियम में संशोधन करने का निर्देश दिया है।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में अध्यापकों के 63 व संस्कृत विवि में करीब 72 पद रिक्त हैं। दोनों विवि में रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए काफी पहले ही विज्ञापन जारी किया गया था। वहीं जुलाई में अध्यापकों की नियुक्ति के लिए यूजीसी ने नई गाइडलाइन जारी कर दी। इसे देखते हुए काशी विद्यापीठ ने न केवल परिनियम में संशोधन किया, अपितु कार्यपरिषद की भी मुहर लगवाई। साथ ही नए नियम के तहत दोबारा विज्ञापन भी जारी किया था। वहीं प्रशासन पुराने नियम के तहत ही नियुक्ति करने की तैयारी कर रहा है। यूजीसी की नई गाइडलाइन को परिनियम में अब तक शामिल नहीं कर सका है। इतना ही नहीं नए नियम के तहत दोबारा विज्ञापन भी नहीं जारी किए गए हैं। ऐसे में में अध्यापकों की नियुक्ति फंसने की आशंका है। 1संस्कृत विवि के कुलपति का तीन वर्ष का कार्यकाल पहली फरवरी 2018 को समाप्त हो रहा है। तीन माह पहले कुलपति का पावर सीज हो जाएगा। ऐसे में यदि समय से परिनियम में संशोधन नहीं किया गया तो कुलपति के लिए नियुक्ति करना आसान नहीं होगा। इसके लिए उन्हें राजभवन से फिर अनुमति लेनी होगी। दूसरी ओर विश्वविद्यालय के अध्यापकों ने भी नियुक्ति प्रक्रिया रोकने की मांग की है। इस संबंध में अध्यापकों ने कुलपति को एक पत्रक भी सौंपा है।’>>राजभवन ने यूजीसी के नए नियम से नियुक्ति का दिया निर्देश 1’>>संशोधित होगा परिनियम, नए सिरे से जारी करना होगा विज्ञापन
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में अध्यापकों के 63 व संस्कृत विवि में करीब 72 पद रिक्त हैं। दोनों विवि में रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए काफी पहले ही विज्ञापन जारी किया गया था। वहीं जुलाई में अध्यापकों की नियुक्ति के लिए यूजीसी ने नई गाइडलाइन जारी कर दी। इसे देखते हुए काशी विद्यापीठ ने न केवल परिनियम में संशोधन किया, अपितु कार्यपरिषद की भी मुहर लगवाई। साथ ही नए नियम के तहत दोबारा विज्ञापन भी जारी किया था। वहीं प्रशासन पुराने नियम के तहत ही नियुक्ति करने की तैयारी कर रहा है। यूजीसी की नई गाइडलाइन को परिनियम में अब तक शामिल नहीं कर सका है। इतना ही नहीं नए नियम के तहत दोबारा विज्ञापन भी नहीं जारी किए गए हैं। ऐसे में में अध्यापकों की नियुक्ति फंसने की आशंका है। 1संस्कृत विवि के कुलपति का तीन वर्ष का कार्यकाल पहली फरवरी 2018 को समाप्त हो रहा है। तीन माह पहले कुलपति का पावर सीज हो जाएगा। ऐसे में यदि समय से परिनियम में संशोधन नहीं किया गया तो कुलपति के लिए नियुक्ति करना आसान नहीं होगा। इसके लिए उन्हें राजभवन से फिर अनुमति लेनी होगी। दूसरी ओर विश्वविद्यालय के अध्यापकों ने भी नियुक्ति प्रक्रिया रोकने की मांग की है। इस संबंध में अध्यापकों ने कुलपति को एक पत्रक भी सौंपा है।’>>राजभवन ने यूजीसी के नए नियम से नियुक्ति का दिया निर्देश 1’>>संशोधित होगा परिनियम, नए सिरे से जारी करना होगा विज्ञापन
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