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बीएड डिग्री धारक चपरासी बनने को तैयार: ’बेरोजगारों को नौकरी दिलाने के पीएम के दावें नहीं हो रहे साकार

सहारनपुर कपिल पूनिया स्कूलों में चपरासी की नौकरी पाने के लिए बीएड डिग्री धारक अभ्यर्थी भी कतार में हैं। चपरासी की नौकरी के लिए शैक्षिक योग्यता तो केवल कक्षा आठ पास है, मगर बेरोजगारी का आलम यह है कि
इस नौकरी के लिए ग्रेजुएट और आईटीआई पास युवक-युवतियां तक आवेदन कर रहे हैं।
जिले के नौ कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों में विभिन्न रिक्त पदों के सापेक्ष भर्ती निकली है। इनमें तीन पद चपरासी के भी हैं। तीन पदों के सापेक्ष अब तक सौ से अधिक आवेदन आ चुके हैं। देश और प्रदेश में सत्ता में आने से पूर्व भाजपा नेताओं ने बेरोजगारी कम करने के मुद्दे को प्रमुखता दी थी। बेशुमार नौकरियां निकालकर युवाओं को रोजगार दिलाने के सपने दिखाए गए। भाजपा की केंद्र में सरकार बने तीन साल, जबकि उत्तर-प्रदेश की भाजपा सरकार को छह माह से अधिक समय बीत चुका है। इसके बाद भी बेरोजगार युवक-युवतियों के लिए अच्छे दिन नहीं आए। इसका सटीक और ताजा उदाहरण सहारनपुर में सामने आया है। जिले में नौ कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय है। इन विद्यालय में वार्डन, रसोईया, क्र्लक, धोबी, चौकीदार, माली और चपरासी के पदों पर भर्ती प्रक्रिया गतिमान है। सभी पदों के लिए जिला बेसिक शिक्षा विभाग में अभ्यर्थियों से आवेदन प्राप्त किए जा रहे हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर है। चौंकाने वाली बात है कि चपरासी के मात्र तीन पदों के लिए सौ से अधिक आवेदन विभाग को प्राप्त हो चुके है, और सिलसिला जारी है। सहारनपुर के अलावा अन्य जिलों से भी आवेदन किए जा रहे हैं।

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