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साभार हिमांशु राणा: शिक्षामित्रों के भारांक मामले पर लीगल पॉइंट्स

साभार हिमांशु राणा
मा० सर्वोच्च न्यायालय जब अपने निर्णय में दबे शब्दों में लिखा चुका है कि कैसे भी शिक्षामित्र (टेट उत्तीर्ण या बिना टेट उन्हें नहीं पता) न्यूनतम अहर्ताओं को पूर्ण करने के पश्चात विधायिका द्वारा [अनुच्छेद 309 (संघ या
राज्य की सेवा करने वाले व्यक्तियों की भर्ती और सेवा की शर्तें) , अनुच्छेद 16 (लोक नियोजन में समता का अधिकार) एवं अनुच्छेद 14 (विधि के समक्ष समानता)] निकाली गई एवं कोष्ठक में दर्शित विधि-सम्मत संवैधानिक नियमों के साथ अगले दो विज्ञापन में आवेदन करके मेरिट पर लड़कर ही सहायक अध्यापक बन सकेगा तो फिर ये सब बखेड़ा क्यों खड़ा कर रहे हैं अब अधिकारी ?

बिलकुल भारांक का हवाला मा० न्यायालय ने रखा है लेकिन भारांक आप अकेले नहीं , तभी दे पाएंगे जब मुकाबला खुली चुनौती में हो | बहरहाल ये तो होने से रहा क्यूंकि टीईटी उत्तीर्ण केवल यही नहीं बहुत से अभ्यर्थी बैठे हैं तो उन्हें भी साथ लेकर चलना होगा और बाकी मा० सर्वोच्च न्यायालय का आदेश ये नहीं जो ये करना चाह रहे हैं |

मुमकिन नहीं है ये भी मेटर कोर्ट ही जाएगा और अब तक सत्ता-पक्ष के प्रशासन की तरफ से जितने सुझाव उलट-सुलट सुझाये गए हैं सभी मा० न्यायालय की तरफ अग्रसर हैं क्यूंकि समाजवादी पार्टी के द्वारा किये गए समायोजन की तरह ये भी 👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻 बैक डोर एंट्री ही है और बैक डोर एंट्री का क्या होता है वे अब सभी जानते हैं |
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