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शिक्षा मित्रों को टीईटी पास करने की बाध्यता से मुक्ति मिलने की उम्मीद , कोर्ट जाएगी सरकार

देहरादून। राज्य के स्कूलों में पिछले ढाई सालों से प्राथमिक शिक्षकों के तौर पर अपनी सेवाएं देने वाले करीब साढ़े तीन हजार शिक्षा मित्रों को टीईटी पास करने की बाध्यता से मुक्ति मिलने की उम्मीद जगी है।
सरकार अब इनके मुद्दों को लेकर हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका या सुप्रीम कोर्ट में विशेष अपील दाखिल कर सकती है। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने इस संबंध में शिक्षा निदेशक आरके कुंवर को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
शिक्षा मित्रों को मिलेगी राहत
गौरतलब है कि राज्य के दूर दराज के स्कूलांे में सालों से बतौर शिक्षा मित्र अपनी सेवाएं दे रहे प्राथमिक शिक्षकों की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ गई हैं। हाईकोर्ट ने प्राथमिक शिक्षकों के लिए भी टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया है। आपको बता दें कि शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के पदों पर भर्ती के लिए बाकायदा डीएलएड का प्रशिक्षण भी दिलाया गया। इसके लिए एमएचआरडी और एनसीटीई से अनुमति भी ली है। यहां बता दें कि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद इन शिक्षा मित्रों को जनवरी, 2015 में शिक्षा पात्रता परीक्षा (टीईटी-एक) से मुक्त कर बतौर सहायक अध्यापक राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में समायोजित किया गया था।

हाईकोर्ट में दाखिल होगी पुनर्विचार याचिका

अब हाईकोर्ट द्वारा इन शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य करते हुए सरकार को आदेश का अनुपालन करने के निर्देश दिए हैं। इस बात को लेकर  बतौर प्राथमिक शिक्षक ढाई साल का अरसा गुजार चुके ये शिक्षक अब टीईटी को लेकर बेचैन हैं। उत्तराखंड समायोजित शिक्षक संघ के अध्यक्ष ने शिक्षामंत्री से मुलाकात कर इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने टीईटी की अनिवार्यता से राहत दिलाने के लिए हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका अथवा सुप्रीम कोर्ट में विशेष अपील दाखिल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश से उनके रोजगार पर संकट गहरा सकता है।
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