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स्कूलों में शिक्षामित्रों ने नहीं किया काम, आज जाएंगे दिल्ली: गपियाते रहे अलग बैठकर

संयुक्त शिक्षामित्र संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहे आंदोलन के चौथे दिन शनिवार को शिक्षामित्रों ने काली पट्टी बांध कर शिक्षण कार्य का बहिष्कार किया।
11 सितंबर से जंतर-मंतर दिल्ली में शुरू होने जा रहे धरने में शामिल होने के लिए जिले के 3500 शिक्षामित्र रविवार को रवाना होंगे।शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष वसीम अहमद व अश्वनी त्रिपाठी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने एक अगस्त व 23 अगस्त को शिक्षामित्रों के शिष्टमंडल से चर्चा के बाद पांच वरिष्ठ अफसरों की कमेटी बनाई थी। साथ ही सभी शिक्षामित्रों से पठन-पाठन सुचारु रूप से चलाने का अनुरोध किया था। जिस पर प्रदेशभर के शिक्षामित्र विद्यालयों में शिक्षण कार्य में लग गए थे। लेकिन शिक्षक दिवस यानी 5 सितम्बर को लगभग 40,000 रुपये पाने वाले समायोजित शिक्षामित्रों को 10,000 रुपये मानदेय प्रतिमाह की दर से 11 माह तक ही दिए जाने के कैबिनेट निर्णय ने शिक्षामित्रों के दर्द को कुरेदने का काम किया। कानपुर में मुख्यमंत्री ने कहा कि मानदेय वृद्धि मेरे अधिकार क्षेत्र के बाहर है। इससे असन्तुष्ट होकर संयुक्त मोर्चा ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर 11 सितंबर से धरना देने का निर्णय लिया है। संघ के संरक्षक सुरेन्द्र पांडेय ने कहा कि सरकार हमारी ताकत को खंडित करना चाहती है। टीईटी का शिगूफा फेंककर गुमराह करना चाह रही है।

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