इलाहाबाद : प्रदेश भर के अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में चयनित शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। यदि आवंटित विद्यालय में पद नहीं होगा, दूसरे जिस कालेज में रिक्ति होगी, वहां शिक्षकों को दी जाएगी।
लंबे समय से नियुक्ति पाने के लिए भटक रहे अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। दीपावली बाद से इस आदेश का अनुपालन शुरू होने के आसार हैं। 1अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों के लिए प्रधानाचार्य, प्रवक्ता व एलटी ग्रेड शिक्षकों का चयन माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उप्र से होता रहा है। बीते वर्ष 2009 से लेकर 2013 के बीच तक करीब 700 से अधिक ऐसे प्रवक्ता व एलटी ग्रेड शिक्षक चयन बोर्ड से चयनित हुए, जिन्हें आवंटित स्कूलों में नियुक्ति नहीं मिल सकी। अभ्यर्थी जब तय स्कूलों में पहुंचे तो वहां प्रबंधक व प्रधानाचार्य ने बताया कि यह पद प्रमोशन या फिर जिला विद्यालय निरीक्षक व प्रबंधक की सहमति से भरा जा चुका है। ऐसे में सैकड़ों अभ्यर्थी चयन बोर्ड कार्यालय का नियुक्ति पाने के लिए चक्कर काट रहे थे। चयन बोर्ड को आवंटित स्कूल में संशोधन करने का पहले अधिकार नहीं था। यही नहीं, हाईकोर्ट का यह भी आदेश था कि जिस विज्ञापन के जरिये चयन हुआ है उसी के तहत रिक्त पद पर नियुक्ति होनी चाहिए। 1प्रदेश के तमाम अशासकीय विद्यालय भर्तियों के समय रिक्ति पद का अधियाचन भेज देते थे लेकिन, बाद में गुपचुप तरीके से प्रमोशन या फिर अफसरों से साठगांठ कर अपनों का चयन कर लेते थे। इससे चयन बोर्ड संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य या फिर प्रबंधक का चाहकर भी कुछ कर नहीं पाता था। पिछले दिनों हाईकोर्ट ने इस संबंध में आदेश दिया है कि यदि आवंटित विद्यालय में रिक्त पद नहीं है तो चयनित शिक्षकों को दूसरे कालेजों में नियुक्ति दी जाए। इससे अधर में अटके 700 चयनित प्रवक्ता व एलटी ग्रेड शिक्षकों को अशासकीय कालेजों में नियुक्ति मिलने की राह आसान हो गई है। इसके लिए जिला विद्यालय निरीक्षक को रिपोर्ट भेजनी होगी और चयन बोर्ड आवंटित विद्यालय में बदलाव कर सकेगा। चयन बोर्ड के उप सचिव नवल किशोर ने बताया कि इस आदेश से लंबित प्रकरणों का जल्द निस्तारण होगा। 1शीर्ष कोर्ट अगस्त में दे चुका आदेश : सुप्रीम कोर्ट ने बीते 23 अगस्त, 2017 को ही इस संबंध में आदेश जारी कर चुका है, किसी भी शिक्षक को आवंटित विद्यालय में जगह न मिले तो दूसरे कालेज में नियुक्ति दी जाए।

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लंबे समय से नियुक्ति पाने के लिए भटक रहे अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। दीपावली बाद से इस आदेश का अनुपालन शुरू होने के आसार हैं। 1अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों के लिए प्रधानाचार्य, प्रवक्ता व एलटी ग्रेड शिक्षकों का चयन माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उप्र से होता रहा है। बीते वर्ष 2009 से लेकर 2013 के बीच तक करीब 700 से अधिक ऐसे प्रवक्ता व एलटी ग्रेड शिक्षक चयन बोर्ड से चयनित हुए, जिन्हें आवंटित स्कूलों में नियुक्ति नहीं मिल सकी। अभ्यर्थी जब तय स्कूलों में पहुंचे तो वहां प्रबंधक व प्रधानाचार्य ने बताया कि यह पद प्रमोशन या फिर जिला विद्यालय निरीक्षक व प्रबंधक की सहमति से भरा जा चुका है। ऐसे में सैकड़ों अभ्यर्थी चयन बोर्ड कार्यालय का नियुक्ति पाने के लिए चक्कर काट रहे थे। चयन बोर्ड को आवंटित स्कूल में संशोधन करने का पहले अधिकार नहीं था। यही नहीं, हाईकोर्ट का यह भी आदेश था कि जिस विज्ञापन के जरिये चयन हुआ है उसी के तहत रिक्त पद पर नियुक्ति होनी चाहिए। 1प्रदेश के तमाम अशासकीय विद्यालय भर्तियों के समय रिक्ति पद का अधियाचन भेज देते थे लेकिन, बाद में गुपचुप तरीके से प्रमोशन या फिर अफसरों से साठगांठ कर अपनों का चयन कर लेते थे। इससे चयन बोर्ड संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य या फिर प्रबंधक का चाहकर भी कुछ कर नहीं पाता था। पिछले दिनों हाईकोर्ट ने इस संबंध में आदेश दिया है कि यदि आवंटित विद्यालय में रिक्त पद नहीं है तो चयनित शिक्षकों को दूसरे कालेजों में नियुक्ति दी जाए। इससे अधर में अटके 700 चयनित प्रवक्ता व एलटी ग्रेड शिक्षकों को अशासकीय कालेजों में नियुक्ति मिलने की राह आसान हो गई है। इसके लिए जिला विद्यालय निरीक्षक को रिपोर्ट भेजनी होगी और चयन बोर्ड आवंटित विद्यालय में बदलाव कर सकेगा। चयन बोर्ड के उप सचिव नवल किशोर ने बताया कि इस आदेश से लंबित प्रकरणों का जल्द निस्तारण होगा। 1शीर्ष कोर्ट अगस्त में दे चुका आदेश : सुप्रीम कोर्ट ने बीते 23 अगस्त, 2017 को ही इस संबंध में आदेश जारी कर चुका है, किसी भी शिक्षक को आवंटित विद्यालय में जगह न मिले तो दूसरे कालेज में नियुक्ति दी जाए।

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