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शिक्षक भर्तियों में फर्जी डिग्री से बड़ा है फर्जी सत्यापन का खेल

जागरण संवाददाता, आगरा: बीएड फर्जी डिग्री मामले से अभी विवि उबर भी नहीं पाया है कि अब फर्जी सत्यापन का बड़ा खेल सामने आ गया है।
बीएड फर्जीवाड़े की जांच करते-करते एसआइटी के सामने सत्यापन के फर्जीवाड़े की परतें खुलने लगी हैं। अभी तक जो जांच हुई है उसमें सत्यापन का फर्जीवाड़ा बीएड से भी बड़ा लग रहा है।

बीएड सत्र 2005 के फर्जीवाड़े की जांच के बाद फर्जी सत्यापन का मामले एसआइटी के सामने आए। इसमें से बहुत से मामले सत्र 2007-11 तक के हैं। सत्यापन के कुछ मामले पिछले दो साल के हैं। इसमें शिक्षक भर्ती के लिए बीए, बीएससी, बीकॉम की फर्जी मार्क्‍सशीट बनवाई गई। इनका रिकॉर्ड विवि में नहीं है। इन फर्जी मार्क्‍सशीट से शिक्षा विभाग में नौकरी भी प्राप्त कर ली गई। पिछले पांच सालों में शिक्षा विभाग में हुई बंपर भर्तियों के बाद जब मार्क्‍सशीट सत्यापन का नंबर आया तो विवि में सत्यापन में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा शुरू हुआ। फर्जी मार्क्‍सशीट वालों से विवि कर्मचारियों द्वारा सेटिंग कर ली गई और फर्जी सत्यापन रिपोर्ट बना दी गई।

बीएड फर्जीवाड़े की जांच कर रही थी तो उसके सामने फर्जी सत्यापन के करीब 100 मामले सामने आए। हाईकोर्ट ने इन सभी मामलों की जांच एसआइटी को बीएड फर्जीवाड़े के साथ ही करने के निर्देश दिए थे।

फर्जी सत्यापन में हुई है जेल: कुछ दिनों पहले विवि के चार कर्मचारियों को एसआइटी ने फर्जी सत्यापन के मामले में ही गिरफ्तार कर जेल भेजा है। मैनपुरी में शिक्षा विभाग में तैनात रविश यादव की बीएससी और बीएड की मार्कशीट का फर्जी वेरीफिकेशन कर दिया गया था। इसके अलावा फरुखाबाद के सुखेंद्र सिंह की नियुक्ति के बाद बीए की मार्कशीट का फर्जी वेरीफिकेशन कर दिया गया था।

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