बरेली। निकाय चुनाव के लिए मतदान संपन्न कराने को परिषदीय स्कूलों में तैनात कई शिक्षामित्रों को पीठासीन अधिकारी बना दिया गया है, जबकि सहायक अध्यापकों को ही इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। मामला संज्ञान में आने पर सीडीओ ने बीएसए से रिपोर्ट मांगी है।
जिले में तीन हजार से ज्यादा शिक्षामित्र हैं। सपा सरकार में इन्हें सहायक अध्यापकों के पदों पर समायोजित कर दिया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें उनके मूल पदों पर भेजने का आदेश दे दिया। बीएसए ऑफिस ने निर्वाचन कार्यालय को कार्मिकों की जो सूची भेजी गई, उसमें कई शिक्षामित्रों के भी नाम थे। लिहाजा उनकी चुनाव में ड्यूटी लगा दी गई। इस बाबत जब जानकारी ली गई तो पता लगा कि ऑनलाइन साफ्टवेयर में सहायक अध्यापक का विकल्प नहीं था।
ड्यूटी ऑनलाइन साफ्टवेयर के माध्यम लगाई गईं हैं। इसमें शिक्षामित्र फीड था। सहायक अध्यापक का विकल्प नहीं था। फिर भी ऐसा कैसे हुआ है, इसकी जांच कराई जाएगी। बीएसए से भी रिपोर्ट मांगी गई है।
- सतेंद्र कुमार, सीडीओ
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जिले में तीन हजार से ज्यादा शिक्षामित्र हैं। सपा सरकार में इन्हें सहायक अध्यापकों के पदों पर समायोजित कर दिया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें उनके मूल पदों पर भेजने का आदेश दे दिया। बीएसए ऑफिस ने निर्वाचन कार्यालय को कार्मिकों की जो सूची भेजी गई, उसमें कई शिक्षामित्रों के भी नाम थे। लिहाजा उनकी चुनाव में ड्यूटी लगा दी गई। इस बाबत जब जानकारी ली गई तो पता लगा कि ऑनलाइन साफ्टवेयर में सहायक अध्यापक का विकल्प नहीं था।
ड्यूटी ऑनलाइन साफ्टवेयर के माध्यम लगाई गईं हैं। इसमें शिक्षामित्र फीड था। सहायक अध्यापक का विकल्प नहीं था। फिर भी ऐसा कैसे हुआ है, इसकी जांच कराई जाएगी। बीएसए से भी रिपोर्ट मांगी गई है।
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