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प्रदेश शिक्षा मित्रों के लिए महत्वपूर्ण सूचना, सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट में खड़ा किया सवाल

जैसा की हम सभी जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट से मित्रों का समायोजन रद्द होने के बाद प्रदेश का शिक्षा मित्र का तार परेशानियां झेल रहा है परेशानी के लिए शिक्षा मित्रों के लिए एक अच्छी खबर आई है इलाहाबाद हाईकोर्ट में
दाखिल रिट पर बहस करते हुए हाई कोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब तलब किया है कि वह प्रदेश के सभी शिक्षा मित्रों को उनको मूल विद्यालय में अब तक क्यों न भेज सके याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस बेसिक शिक्षा विभाग समेत राज्य सरकार से भी जवाब तलब किया है सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में ही विद्युत था कि शिक्षा मित्रों को सरकार उनके मूल विद्यालय में भेजें और मानदेय पर निर्णय लें उसी आधार पर योगी सरकार ने शिक्षामित्रों का मानदेय 10000 प्रतिमा कर दिया है लेकिन उन्हें समायोजन होने के बाद जिस विद्यालय में जोइनिंग मिली थी आज भी वह उसी विद्यालय में ड्यूटी कर रहे हैं ऐसे में शिक्षामित्रों ने रिट दाखिल की अपने घरों से दूरदराज के इलाकों में नौकरी कर रहे हैं या रोजाना विद्यालय में जाने को मजबूर है उन्हें 10000 के मानदेय मैं वहां जाना काफी  और महंगा पड़ता है.
हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कोर्ट के निर्णय का क्यों नहीं किया गया पालन?
 मित्रों के लिए ड्यूटी कर पाना काफी मुश्किल है इस पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया और सुप्रीम कोर्ट ने समायोजन रद्द किया था और अपने निर्णय में कहा था कि शिक्षा मित्रों को उनके मूल विद्यालय जिसमें उनकी प्रथम नियुक्ति हुई थी वहां विकल्प लेकर भेजा जाए आखिरकार इस आदेश का राज सरकार ने अभी तक पालन क्यों नहीं किया इस बाबत में योगी सरकार से जवाब मांगा है जिससे शिक्षामित्रों को मूल तैनाती वाले विद्यालयों में जाने का रास्ता अब साफ हो गया है मामले की अगली सुनवाई 12 दिसंबर को माननीय हाईकोर्ट में होगी धन्यवाद
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