शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा से उर्दू भाषा को हटाने से इस भाषा की पढ़ाई करने वालों में आक्रोश है।
बेरोजगारों का कहना है कि सरकार ने यूपी-टीईटी 2017 में हिन्दी, अंग्रेजी व संस्कृत के साथ उर्दू भाषा का भी विकल्प दिया था। लेकिन जब शिक्षक पद पर नौकरी देने के लिए परीक्षा कराने का समय आया तो इन्हें बाहर कर दिया गया। यह उन हजारों अभ्यर्थियों के साथ धोखा है जिन्होंने उर्दू भाषा से प्राथमिक स्तर की टीईटी पास की है और सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति की सभी योग्यता रखते हैं।


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