यह उनकी धरोहर के रूप में है। इसकी उपेक्षा
नहीं होनी चाहिए। यहां से पढ़े विद्वानों ने देश-दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है और आज यही महाविद्यालय शिक्षकों और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। इसके सामने अपना अस्तित्व बचाने का संकट है। उक्त बातें सच्चा आश्रम संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य चंद्रदेव मिश्र ने कहीं। वह श्री धर्मज्ञानोपदेश संस्कृत महाविद्यालय के 208वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।

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