लखनऊ. उत्तर प्रदेश के कई प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में पढ़ा रहे ऐसे अध्यापक जिनकी बीएड की डिग्री फर्जी पाई गई है वे फिलहाल काम
करते रहेंगे। हाईकोर्ट ने ऐसे अध्यापकों के काम में किसी तरह का हस्तक्षेप
करने से रोक लगा दी है। साथ ही हाईकोर्ट ने ऐसे अध्यापकों को नियमित वेतन
देने के भी निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने दिए आदेश
हालांकि हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा विभाग से कहा है कि वह दोषी पाए गए
अध्यापकों की बर्खास्तगी की प्रक्रिया को जारी रख सकता है। दरअसल इन
अध्यापकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसी याचिका पर सुनवाई करते
हुए न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने यह आदेश दिया है। याचिका दायर करने वाले
अध्यापकों का कहना है कि वह उत्तर प्रदेश के विभिन्न परिषदीय स्कूलों में
सहायक अध्यापक के पद पर काम करे रहे हैं। सत्र 2004-2005 में आगरा
विश्विद्यालय द्वारा आयोजित बीएड परीक्षा में फर्जी मार्कशीट और
प्रमाणपत्र जारी करने की शिकायत पर एसआईटी ने जांच की और जांच रिपोर्ट के
आधार पर बेसिक शिक्षा विभाग उनको नोटिस जारी कर बर्खास्तगी की कार्रवाई कर
रहा है।
हाईकोर्ट ने मांगी जानकारी
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने एक अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए 16,448
सहायक अध्यापक भर्ती मामले में प्रदेश सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग से
रिक्त पदों की जानकारी मांगी है। याचिकाकर्ता की विशेष अपील पर सुनवाई करते
हुए यह आदेश न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति अशोक कुमार की पीठ
ने दिया है। याचिकाकर्ता के वकील सीमांत सिंह का करना था कि याचीगण 16,448
सहायक अध्यापक भर्ती में चयनित थे। मगर उसी समय शिक्षा मित्रों का सहायक
अध्यापक पद पर समायोजन होने के कारण उन्होंने 16,448 सहायक अध्यापकों की
भर्ती में ज्वाइनिंग नहीं ली थी। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा मित्रों
का समायोजन रद्द कर दिया है। वहीं 16,448 सहायक अध्यापक की भर्ती में
शामिल करने की उनकी याचिका एकल न्यायपीठ ने यह कह कर खारिज कर दी कि
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक रिक्त पदों पर नए सिरे से विज्ञापन
जारी करके नियुक्ति की जाए।
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