लखनऊ : महिलाओं और उनके बच्चों की पोषण से जुड़ी सरकारी सुविधाओं की मॉनिटरिंग के लिए आंगनबाड़ी वर्करों को स्मार्टफोन दिए जाएंगे। ये स्मार्टफोन केंद्र सरकार द्वारा डिवेलप कॉमन अप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (सीएएस) अपलोड करके आंगनबाड़ी वर्करों को दिए जाएंगे।
कुपोषण की ज्यादा दर वाले 40 जिलों के वर्करों के लिए 54 हजार स्मार्टफोन खरीदे जा चुके हैं। जल्द इन्हें वितरित किया जाएगा।
नैशनल न्यूट्रीशियन मिशन (एनएनएम) और नीति आयोग ने सर्वे करके देश में 100 कुपोषित जिले छांटे थे। इनमें 29 यूपी के हैं। बाल विकास पुष्टाहार विभाग की सचिव अनीता सी़ मेश्राम ने बताया कि कुपोषण की ज्यादा दर वाले जो जिले छूट गए थे, उन्हें बाद में इस लिस्ट में जोड़ा गया है। इनकी संख्या फिलहाल 40 है। इन सभी जिलों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन दिए जाएंगे। ये सभी 40 जिले आईसीडीएस सिस्टम्स स्ट्रेंथनिंग ऐंड न्यूट्रिशन इम्प्रूवमेंट प्रॉजेक्ट (इसनिप) के तहत आते हैं।
ऐसे होगी मॉनिटरिंग : आंगनबाड़ी वर्कर बच्चे का भार लेकर उसे सीएएस पोर्टल पर अपलोड करेंगी। इसे उसी समय स्टेट लेवल पर और नैशनल लेवल पर देखा जा सकेगा। पहले आंगनबाड़ी वर्कर मां और बच्चों का भार, पोषण, टीके और अन्य जानकारियां एक रजिस्टर पर लिखती थीं। यह भी शिकायत आती थी कि आंगनबाड़ी वर्कर सेंटरों पर नहीं जाती हैं, जिससे डेटा स्टेट लेवल पर पहुंचने में समय लगता था।
ये फायदे होंगे : रियल टाइम मॉनिटरिंग का डेटा प्रदेश और केंद्र स्तर पर होने के बाद माना जा सकता है कि ज्यादा कुपोषित बच्चों के लिए विशेष ध्यान दिए जाने के निर्देश जारी हो सकते हैं। उन्हें दूसरी सरकारी मदद दी जा सकती है। जिला स्तर की योजनाओं को ब्लॉक या ग्राम विशेष में बेहतर तरीके से लागू किया जा सकता है।
रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए आंगनबाड़ी वर्करों को स्मार्टफोन दिए जाने हैं। पहले यह योजना कुछ जिलों में शुरू होगी। इसे इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। - अनीता सी़ मेश्राम, सचिव, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग

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कुपोषण की ज्यादा दर वाले 40 जिलों के वर्करों के लिए 54 हजार स्मार्टफोन खरीदे जा चुके हैं। जल्द इन्हें वितरित किया जाएगा।
नैशनल न्यूट्रीशियन मिशन (एनएनएम) और नीति आयोग ने सर्वे करके देश में 100 कुपोषित जिले छांटे थे। इनमें 29 यूपी के हैं। बाल विकास पुष्टाहार विभाग की सचिव अनीता सी़ मेश्राम ने बताया कि कुपोषण की ज्यादा दर वाले जो जिले छूट गए थे, उन्हें बाद में इस लिस्ट में जोड़ा गया है। इनकी संख्या फिलहाल 40 है। इन सभी जिलों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन दिए जाएंगे। ये सभी 40 जिले आईसीडीएस सिस्टम्स स्ट्रेंथनिंग ऐंड न्यूट्रिशन इम्प्रूवमेंट प्रॉजेक्ट (इसनिप) के तहत आते हैं।
ऐसे होगी मॉनिटरिंग : आंगनबाड़ी वर्कर बच्चे का भार लेकर उसे सीएएस पोर्टल पर अपलोड करेंगी। इसे उसी समय स्टेट लेवल पर और नैशनल लेवल पर देखा जा सकेगा। पहले आंगनबाड़ी वर्कर मां और बच्चों का भार, पोषण, टीके और अन्य जानकारियां एक रजिस्टर पर लिखती थीं। यह भी शिकायत आती थी कि आंगनबाड़ी वर्कर सेंटरों पर नहीं जाती हैं, जिससे डेटा स्टेट लेवल पर पहुंचने में समय लगता था।
ये फायदे होंगे : रियल टाइम मॉनिटरिंग का डेटा प्रदेश और केंद्र स्तर पर होने के बाद माना जा सकता है कि ज्यादा कुपोषित बच्चों के लिए विशेष ध्यान दिए जाने के निर्देश जारी हो सकते हैं। उन्हें दूसरी सरकारी मदद दी जा सकती है। जिला स्तर की योजनाओं को ब्लॉक या ग्राम विशेष में बेहतर तरीके से लागू किया जा सकता है।
रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए आंगनबाड़ी वर्करों को स्मार्टफोन दिए जाने हैं। पहले यह योजना कुछ जिलों में शुरू होगी। इसे इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। - अनीता सी़ मेश्राम, सचिव, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग

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