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फर्जी शिक्षामित्रों से होती थी प्रतिमाह वसूली

प्रतापगढ़। फर्जी शिक्षामित्रों के समायोजन में एक और खेल का खुलासा हुआ है। प्राइमरी स्कूलों में तैनाती पाने वाले सहायक अध्यापकों से प्रतिमाह निश्चित राशि की वसूली होती थी। विभाग के शिकंजे में आने वाले फर्जी शिक्षामित्र अब कार्रवाई से बचने के लिए कभी विभाग, तो कभी नेताओं की परिक्रमा कर रहे हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग में बगैर शिक्षामित्र बने ही 31 लोगों को सहायक अध्यापक बनाने का खुलासा होने के बाद फर्जी शिक्षामित्र गांव से फरार हो गए हैं। ऐसे शिक्षामित्रों ने खुलासा किया है कि सहायक अध्यापक बनने के एवज में मोटी रकम की डिमांड की गई थी। प्राइमरी स्कूलों में सहायक अध्यापक के रुप में तैनाती पाने वाले फर्जी शिक्षामित्रों से प्रतिमाह निश्चित धनराशि की उगाही की जाती थी। हालांकि यह धनराशि तभी देना पड़ता था, जब खाते में वेतन आ जाता था। इस खेल का खुलासा न हो, इसलिए नकद धनराशि देनी पड़ती थी।

बेसिक शिक्षा विभाग भले ही फर्जी शिक्षामित्रों का नाम उजागर नहीं कर रहा है, मगर सूची तैयार होने से उनमें हड़कंप है। फिलहाल विभागीय अधिकारी फर्जी शिक्षामित्रों के तैनाती से लेकर वेतन भुगतान का कागजी साक्ष्य जुटाने में लगे हुए हैं। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि जब तक व्यक्तिगत रूप से फर्जी शिक्षामित्र जबाब दाखिल नहीं कर देते हैं, तब तक प्राथमिकी नहीं दर्ज कराई जाएगी। बेसिक शिक्षा विभाग में वर्ष 2017 में 52 शिक्षक फर्जी अभिलेखों पर नौकरी करते हुए पकड़े जा चुके हैं। इसमें 31 फर्जी शिक्षामित्र, 19 अभिलेख सत्यापन के दौरान पकड़े गए और दो शिक्षकों ने गैरजनपद तबादले में फर्जी तैनाती ले ली थी। सपा राज में तैनाती पाने वाले शिक्षकों के अभिलेखों की जांच का अभियान जिले में चल रहा है। फिलहाल अभी किसी भी खंड शिक्षा अधिकारी ने जांच करने अपनी रिपोर्ट नहीं दी है। बीएसए बीएन सिंह का कहना है कि फर्जी शिक्षामित्रों से प्रतिमाह वसूली की शिकायत मिल रही हैं, फिलहाल जब तक आरोपियों का जबाब नहीं आ जाता है, तब तक नाम सार्वजनिक नहीं किया जाएगा और न ही मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
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