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बीएसए की भ्रष्ट नीतियों से सरकारी सुविधाओं से वंचित है छात्र

फिरोजाबाद। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण जहां गरीब बच्चों को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा देय सुविधाएं प्राप्त नहीं हो पा रही है वही बच्चों को शिक्षा प्राप्त कर पाने में अनेक असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
शिक्षा अधिकारी की भ्रष्ट नीतियों के कारण अभिभावकों में असंतोष व्याप्त है। प्रदेश सरकार द्वारा जिले के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षारत छात्रों को बस्ता,किताबें,जूते,पुष्टाहार जैसी कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं लेकिन बीएसए एवं एबीएसए की भ्रष्ट नीतियों के कारण उन्हें सरकार द्वारा दें सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं तथा विद्यालय नियुक्त स्टाफ को वेतन आदि भी नहीं मिल पा रहा है।

जनपद के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में कई प्राथमिक विद्यालय ऐसे भी हैं जिनमें मानक के आधार पर बच्चे हैं किंतु ऐसे स्कूलों का बीएसए वह भी ऐसे निरीक्षण नहीं कर रहे हैं तथा उन्हें टाला जा रहा है क्योंकि मानक धारी विद्यालयों से बीएसए को सुविधा शुल्क मिलने की कोई उम्मीद नहीं है और ऐसे विद्यालयों के शिक्षक व प्रबंध कमेटी के पदाधिकारीगण भ्रष्ट मानसिकता को नहीं कर सकते।

उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों का कहना है कि हमारे विद्यालय में 600- 700 बच्चें शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और विद्यालय सभी मानकों पर खरा उतर रहा है किंतु कई बार विद्यालय का निरीक्षण करने का बीएसए से आग्रह भी किया जा चुका है किंतु वह आजकल-आजकल निरीक्षण करने का भरोसा तो दिला देते हैं किन्तु महीनों गुजर गयें लेकिन अभी तक उनका निरीक्षण नहीं किया गया जिसके कारण गरीब बच्चे मिलने वाली सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं और बच्चे अभिभावक उनकी इन नीतियों से परेशान है इसके चलते बच्चों को खाना,जूते बैग,किताबें जैसी देय सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं वही विद्यालयों में नियुक्त शिक्षक,कर्मचारियों को वेतन आदि ना मिल पाने की शिकायतें मिल रही है।

ऐसे लोगों का कहना है कि बीएसए डॉ. सच्चिदानंद यादव भ्रष्टाचार के दलदल में फंसे होने से उन विद्यालयों में छापेमारी कर भ्रष्ट मानक से सुविधा शुल्क वसूल रहे हैं जो शिक्षा मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे कई प्राथमिक विद्यालय सामने आए हैं जिनमें शिक्षक व कर्मचारियों को बीएसए का हठधर्मी के कारण महीनों से वेतन नहीं मिल पा रहा है वह किसी प्रकार से ऐसी महंगाई के दौर दौर में अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं।
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