■ जबसे LT ग्रेड की भर्तियां आई हैं तबसे कुछ तबगे एक्टिव मोड पर आगये
हैं। हर कोई अपने चयन की वकालत अपने तरीके से करना चाहता है वहीँ कुछ चंदा
चोर भी हाइबरनेशन से जागकर उठ खड़े हुए हैं।
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■ *इसमें एक धड़ा वो भी है जो कह रहा है कि शैक्षिक गुणांक आधारित चयन
पद्धति गलत है और वो या तो विरोध में धरना दे रहे हैं या एक कदम आगे बढ़ कर
लिखित परीक्षा से चयन के सम्बन्ध में न्यायालय जाने की तैयारी कर रहे हैं।*
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■ ऐसे ही धड़ों के जाल में कुछ मासूम अभ्यर्थी फंस जाते हैं जिससे भर्ती
पूरे होते हुए भी न्यायालय के अंतिम निर्णय की मोहताज हो जाती है।
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■ तो आप सभी की जानकारी बढ़ाने के लिए आज यह पोस्ट की जा रही है। दरअसल जैसा
इस भर्ती में करने का प्रयास किया जा रहा है ऐसा ही प्रयास 28 सितम्बर
2014 की LT ग्रेड टीचर्स भर्ती में भी हो चुका है।
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■ ललिता सिंह और विनोद कुमार यादव ने 2014 में अधिवक्ता सीमान्त सिंह के
द्वारा दो अलग अलग याचिकाएं कोर्ट में दाखिल की थीं। {WRIT C - 58787/2014
और WRIT C 57025/2014} जिनको खंडपीठ में मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़
के साथ वरिष्ठ न्यायाधीश पी एस बघेल ने निर्णीत किया।
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■ इन्होंने उत्तर प्रदेश सबऑर्डिनेट एडुकेशनल ( ट्रेंड ग्रेजुएट्स ग्रेड )
सर्विस रूल, 1983 के नियम 15 के उपनियम (2) अपेंडिक्स डी को उल्ट्रवायर्स
करने की मांग की थी।
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■ नियम 15(2) के अपेंडिक्स डी में शैक्षिक गुणांक का निर्धारण कैसे करें और
मेरिट कैसे बनाएं इस सम्बन्ध में विवरण दिया गया था जिससे आप सभी भलीभांति
परिचित हैं।
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■ सीमान्त सिंह ने यह दलील रखी थी कि *विभिन्न बोर्ड्स से उत्तीर्ण
अभ्यर्थी के परसेंटेज को एक समान बनाने का कोई फार्मूला नहीं दिया गया
है*और साथ ही अभ्यर्थी की पर्सनालिटी का पता इन गुणांक से नहीं चल सकता और
ऐसा करने के लिए कोई इंटरव्यू भी नहीं रखा गया है इसलिए चयन को लिखित
परीक्षा और इंटरव्यू के माध्यम से किया जाना चाहिए।
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■ जज साहब ने कहा कि इस नियम की संवैधानिक वैधता निर्धारित करने का विषय यह
नहीं है कि एक अच्छा विकल्प उपलब्ध है या नही क्योंकि ये तो नियम बनाने
वाले विशेषज्ञ प्राधिकारी के ऊपर निर्भर है, विषय यह है कि क्या ये वर्तमान
नियम मनमाना और दोषपूर्ण तो नहीं है?
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■ उन्होंने आगे कहा कि शैक्षिक गुणांक प्रणाली में कोई कमी नहीं है बल्कि
ये पूरी पारदर्शी प्रणाली है जिसमे किसी भी तरह का पक्षपात होना दुर्लभ है।
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■ और कहा कि जहां तक इंटरव्यू कराने की बात है तो एक तो ये जी आई सी में
भर्ती की एंट्री लेवल पोस्ट्स है दूसरा यह की चयन प्रक्रिया का पूरा अधिकार
नियम बनाने वाले विशेषज्ञ को ही हासिल है। हम इसमें कुछ नहीं कर सकते हैं।
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■ जहां तक शैक्षिक गुणांक हटाकर लिखित परीक्षा से चयन करने का प्रश्न है तो
राज्य उसके लिए बाध्य नहीं है और यह नीति बनाने का अधिकार भी पूरी तरह से
राज्य के ऊपर है।
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■ और *इतना कहकर जज साहब ने याचिका खारिज कर दी।*
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■ पर इस निर्णय का यह मतलब नहीं है कि एकेडमिक मेरिट आधारित परिषदीय
विद्यालयों में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षक भर्तियां सेफ हैं क्योंकि
वहां भर्तियां रदद् संशोधन पर हुई हैं इसलिए कोर्ट में हैं। हालाँकि
गुणांक प्रणाली में कोर्ट हस्तक्षेप मुश्किल ही करेगी। सब भविष्य के गर्भ
में हैं। देखते हैं।
आपका शुभचिंतक
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