आगरा। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ द्वारा सर्वोच्चय न्यायालय
के फैसले के बाद प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षामित्रों के साथ बरती जा रही
उदासीनता तथा आर्थिक तंगी व अवसाद से ग्रसित होकर पूरे प्रदेश के उन 400
शिक्षामित्र साथियों को श्रद्धांजलि दी, जिनकी अभी तक मौत हो चुकी है।
गलत नीतियों की वजह से गईं जानें
जिलाध्यक्ष वीरेन्द्र छौंकर ने कहा कि वर्तमान सरकार की गलत नीतियों एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
द्वारा चुनाव से पूर्व शिक्षामित्रों से किया हुआ अपना वायदा पूरा न करने
से दुखी होकर आत्महत्या जैसा कदम उठाने को शिक्षामित्र मजबूर हो रहे हैं।
शिशुपाल सिंह चाहर ने कहा कि विभागीय अधिकारियों की लापरवाही की वजह से
शिक्षामित्रों का मानदेय समय से नहीं मिल पा रहा है। जनवरी माह का मानदेय,
बकाया एरियर, बोनस, डीए तथा जुलाई माह का अवशेष छह दिन का वेतन अभी तक
भुगतान नहीं किया गया है। यदि जनपद में आर्थिक तंगी से आहत होकर एक भी
शिक्षामित्र हताहत हुआ, तो इसके जिम्मेदार विभागीय अधिकारी होंगे।
ये भी मांग
शिक्षामित्र संगठन ने मृतक शिक्षामित्र साथियों के परिवार के लिए 20 - 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता एवं परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी
की मांग की। जिससे पीड़ित परिवार का भरण पोषण हो सके। साथ ही मांग की गई
कि प्रदेश में शिक्षामित्रों की आए दिन सदमा एवं आर्थिक तंगी से ग्रसित
होकर हो रही मृत्यु को रोकने के लिए 9 अगस्त 2017 को केन्द्र सरकार की
अधिसूचना का पालन करते हुए उत्तराखंड की तर्ज पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा
भी शिक्षामित्रों को पहले की तरह सहायक अध्यापक पद पर किया जाए।
ये रहे मौजूद
श्रद्धांजलि सभा में राम निवास, खजान सिंह, सत्यवीर
सिंह, सतेन्द्र पाल शर्मा, रघुवीर शर्मा, जय सिंह, सचिन सिसोंधिया, उमेश
यादव, माधुरी सोलंकी, नीरज चाहर, साधना, ममता शर्मा, वीना चाहर आदि मौजूद
रहीं। अध्यक्षता जय सिंह धाकरे ने तथा संचालन राकेश बघेल ने किया।
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