लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई
कैबिनेट बैठक में एक और बड़ा फैसला हुआ है। अब दूसरे राज्यों से डिप्लोमा
इन एलिमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) या राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा
परिषद (एनसीटीई) द्वारा समय-समय पर जारी की गईं
अधिसूचनाओं में प्राथमिक शिक्षकों के लिए मान्य न्यूनतम शैक्षिक योग्यता को
हासिल करने वाले अभ्यर्थी भी प्रदेश में परिषदीय प्राथमिक शिक्षकों की
भर्ती में शामिल हो सकेंगे। इससे परिषदीय शिक्षकों के चयन में प्रतिस्पर्धा
बढ़ेगी। सरकार ने प्रदेश के किसी जिले से बीटीसी (अब डीएलएड) करने वाले
अभ्यर्थी को उसी जिले में शिक्षक की नियुक्ति में प्राथमिकता देने की
अनिवार्यता को भी समाप्त करने का फैसला किया है।
इसके लिए सरकार ने उप्र बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली, 1981 में
संशोधन किया गया है। दूसरे प्रदेशों से एनसीटीई द्वारा मान्य शैक्षिक
अर्हता हासिल करने वाले अभ्यर्थियों को प्रदेश में बेसिक शिक्षकों की भर्ती
में शामिल होने का मौका देने का फैसला उच्च न्यायालय के आदेश पर किया गया
है। वहीं अभी नियमावली के नियम 14 में प्रावधान है कि किसी जिले से
बीटीसी/डीएलएड उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थी को उसी जिले में प्राथमिक
शिक्षकों की नियुक्ति में प्राथमिकता दी जाएगी। इस नियम में संशोधन करते
हुए अब इस अनिवार्यता को खत्म किया गया है। इससे एक जिले से बीटीसी करने
वाले अभ्यर्थी को दूसरे जिले में आवेदन करने पर समान अवसर मिलेगा।
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