लखनऊ. यूपी के शिक्षामित्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा
झटका लगा है। कोर्ट ने शिक्षामित्रों के समायोजन को निरस्त करने का फैसला
बरकरार रखा है। सु्प्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों की पुनर्विचार याचिकाओं को
खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने सहायक अध्यापक के पद से शिक्षामित्रों
का समायोजन निरस्त करने की मांग की थी।
भले ही सुप्रीम कोर्ट ने
शिक्षामित्रों की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है, लेकिन अभी भी
शिक्षामित्रों के पास फिर से सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का एक और मौका
है।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और यू यू ललित की पीठ ने शिक्षामित्रों की
पुनर्विचार याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी, इस याचिका में कोई मेरिट नहीं
हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भले ही शिक्षामित्रों की ये याचिका खारिज हो
गई है, लेकिन शिक्षामित्रों के पास अभी भी सुधारात्मक याचिका दायर करने का
कानूनी विकल्प मौजूद है।
याचिका में शिक्षामित्रों ने कहा था...
शिक्षामित्रों
की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि शिक्षामित्र वर्षों से स्कूलों
में शिक्षण कार्य कर रहे हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन्हें
फिर से शिक्षामित्र बना दिया गया है। इसके चलते यूपी के शिक्षामित्रों के
सामने रोजी-रोटी का संकट है। शिक्षामित्रों की याचिका में अपील की गई थी कि
मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट को अपने फैसले पर फिर से विचार करना चहिये।
1 लाख 78 हजार शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द हुआ था
सुप्रीम
कोर्ट ने अपने फैसले में अच्छी शिक्षा के लिए शिक्षित शिक्षकों की जरूरत
बताते हुए उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षकों के पद से
समायोजन निरस्त कर दिया था। 12 सितंबर 2015 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी
के 1 लाख 78 हजार शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द कर दिया था। इस फैसले को
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों के
सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसले को ही
बरकरार रखा था।
अब शिक्षामित्रों के पास बचे हैं दो विकल्प
सुप्रीम
कोर्ट से पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद यूपी के शिक्षामित्रों के
पास अभी दो विकल्प बचे हैं। एक तो वो फिर से सुधारात्मक याचिका सुप्रीम
कोर्ट में दायर कर सकते हैं। इसके अलावा वह टीईटी और शिक्षक भर्ती लिखित
परीक्षा पास कर शिक्षामित्रों को मिलने वाले भारांक (वेटेज) का लाभ ले सकते
हैं। शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शिक्षामित्रों को अधिकतम 25 अंकों का भारांक
मिलेगा। यह भारांक उनके कार्य अनुभव के आधार पर मिलेगा। जो अधिकतम 10
वर्षों तक ही दिया जाएगा। हर वर्ष के कार्य अनुभव के आधार पर शिक्षक भर्ती
में शिक्षामित्रों को 2.5 अंक दिये जाएंगे।
शिक्षामित्रों को मिलेंगे दो मौके
सुप्रीम कोर्ट ने
जब शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द किया था कि अगर ये शिक्षामित्र टीईटी
(शिक्षक पात्रता परीक्षा) पास कर लेते हैं तो सहायक अध्यापक के पदों पर
होने वाली दो भर्तियों में उन पर विचार किया जाना चाहिए। इस दौरान सुप्रीम
कोर्ट ने यह भी कहा था कि अगर सरकार चाहे तो समायोजन के पूर्व की स्थिति
में शिक्षामित्रों की सेवाएं जारी रख सकती है।
क्या है सुधारात्मक याचिका ?
सुधारात्मक याचिका
किसी भी फैसले पर पुनर्विचार का अंतिम मौका है। इसका आवेदन उस स्थिति में
किया जाता है, जहां प्रभावित होने वाले पक्ष को लगता हो कि उसके मामले में
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन या पक्षपात किया गया हो।
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