लखनऊ : एसएससी की ऑनलाइन परीक्षा में धांधली पकड़ने के बाद स्पेशल टास्क
फोर्स (एसटीएफ) ने उप्र पावर कारपोरेशन लिमिटेड की ऑनलाइन परीक्षा में
गड़बड़ी का राजफाश किया है। पेपर लीक के साथ ही ऑनलाइन परीक्षा में सॉल्वर
गैंग ने इलेक्ट्रानिक उपकरणों के जरिये भी सेंध लगाई थी।
एसटीएफ ने 12
आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनमें लखनऊ स्थित जेके पब्लिक स्कूल व
महाबीर प्रसाद डिग्री कॉलेज के प्रबंधक भी शामिल हैं। 1एसएसपी एसटीएफ
अभिषेक सिंह का कहना है कि अन्य आरोपितों के साथ ही परीक्षा संचालित कराने
वाली कंपनी एपटेक की भूमिका की भी जांच की जा रही है। मामले की अंतरिम
रिपोर्ट जल्द शासन को भेजी जाएगी। प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं उप्र पावर
कारपोरेशन के अध्यक्ष आलोक कुमार का कहना है कि एसटीएफ की रिपोर्ट मिलने पर
परीक्षा रद करने के संबंध में निर्णय किया जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा
कि चयन प्रक्रिया में पूरी पादर्शिता बरती जाए।
11 फरवरी को उप्र पावर कारपोरेशन की जूनियर इंजीनियर (इलेक्टिकल) ट्रेनी पद
की ऑनलाइन परीक्षा हुई थी। जेई के 226 पदों के लिए हुई परीक्षा में करीब
26 हजार अभ्यर्थी शमिल हुए थे। सहायक समीक्षा अधिकारी, कार्यालय सहायक, अपर
निजी सचिव सहित अन्य पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन परीक्षा हुई थी। 18
फरवरी को उत्तर पुस्तिका ऑनलाइन की गई थी, जिस पर अभ्यर्थियों ने अपने नंबर
देखकर परीक्षा में धांधली के आरोप लगाए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने
इसकी जांच एसटीएफ से कराए जाने का निर्देश दिया था। 1डीजीपी ओपी सिंह ने
एसटीएफ को पूरे प्रकरण की गहनता से जांच का निर्देश दिया था। लंबी छानबीन
के बाद एसटीएफ ने आरोपित लखनऊ निवासी ज्ञानेंद्र सिंह यादव, डॉ.अमित सिंह व
सैय्यद अफसर हुसैन, आजमगढ़ निवासी संजय राजभर, बलिया निवासी दीपमणि यादव व
विपिन कुमार सिंह, अंबेडकरनगर निवासी संजय कुमार जायसवाल, मऊ निवासी अभय
यादव, देवरिया निवासी धीरेंद्र वर्मा व संजय कुमार गौड़, इलाहाबाद निवासी
राकेश कुमार व रामबाबू यादव को गिरफ्तार किया है। आरोपितों को पूछताछ के
लिए बुधवार को एसटीएफ मुख्यालय बुलाया गया था, जहां उन्हें गिरफ्तार कर
लिया गया।
सीओ आलोक सिंह ने बताया कि ज्ञानेंद्र सिंह यादव जेके पब्लिक स्कूल के
प्रबंधक व डॉ.अमित सिंह महाबीर प्रसाद डिग्री कॉलेज के मालिक हैं। संजय
राजभर महाबीर कॉलेज का कर्मचारी है। दीपमणि जेके पब्लिक स्कूल सहित अन्य
स्कूलों में कंप्यूटर लैब स्थापित कर चुका है। संजय राजभर व दीपमणि
कंप्यूटरों में एमी ऐडिमिन सॉफ्टवेयर इंस्टाल कर उनके पासवर्ड संजय जायसवाल
के जरिए सॉल्वर गिरोह को भेजते थे। अभय यादव, धीरेंद्र व संजय गौड़
अभ्यर्थियों से संपर्क कर उन्हें गिरोह तक पहुंचाते थे। सैय्यद अफसर, विपिन
सिंह, राकेश कुमार व राम बाबू परीक्षार्थी हैं।
जांच में एसआइटी की मेहनत लाई रंग : शासन के निर्देश पर एसटीएफ के एएसपी
विशाल विक्रम सिंह के नेतृत्व में गठित एसआइटी में शामिल सीओ आलोक सिंह,
सत्यसेन यादव व अमित नागर ने उप्र पावर कारपोरेशन व परीक्षा संचालित कराने
वाले एजेंसी एपटेक से प्रश्नगत परीक्षा का पूर्ण विवरण हासिल कर अपनी
पड़ताल शुरू की थी। शिकायतकर्ता अभ्यर्थियों से पूछताछ में कई अन्य तथ्य
सामने आए थे। एसआइटी ने 26 हजार अभ्यर्थियों के डाटा का विश्लेषण किया,
जिसमें दो तरीकों से परीक्षा में सेंध लगाए जाने की बात सामने आई। पेपर लीक
करके अभ्यर्थियों को 11 फरवरी की दूसरी पाली में होने वाली परीक्षा की
पूरी तैयारी पहले ही करा दी गई थी। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों के
संचालकों व टेक्नीशियनों से सांठगाठ कर कंप्यूटरों में ऐमी ऐडमिन सॉफ्टवेयर
इंस्टाल किया गया और उसका आइडी व पासवर्ड सॉल्वर गैंग को उपलब्ध कराया
गया।
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