शिक्षामित्र 68500 भर्ती पर रोक के लिए पहुंचे सुप्रीम कोर्ट क्या रोक लगेगी? - AG
1) बरेली से शिक्षामित्रों के ग्रुप एमएससी ने सुप्रीम कोर्ट में दो IA
दाखिल की हैं जिनमें उन्होंने दो मांगे उठाई हैं। (IA 24984, 24988/2018)
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*2) उन्होंने मांग की है कि RTE अम्मेण्डमेंट एक्ट 2017 के सापेक्ष उन्हें
2019 तक अनिवार्य योग्यता ग्रहण करने की छूट दी जाए और तब तक 68500 भर्ती
पर रोक लगाई जाए।*
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3) मिशन सुप्रीम कोर्ट ग्रुप और बरेली की जनहित सेवा संस्थान द्वारा
सुप्रीम कोर्ट में एक PIL डाली गयी थी जिसमें शिक्षामित्रों की डेथस को
दिखाया गया है साथ ही यह भी बताया गया है कि 40,000 से 10,000 पर आगये हैं
परिवार पालने में असमर्थ हैं।
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*4) इस PIL में मुख्यतः मांग यही थी कि समान कार्य पर समान वेतन दिया जाए जिस पर नोटिस भी इशू हो गया था।*
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5) हाई कोर्ट में भी ऐसे कई केसेस लगे हैं और कई decide हो गए हैं जिनमें
शिक्षामित्र कहते हैं कि बड़ी जीत मिली है पर उनमें मात्र इतना आदेश हुआ है
कि इन्हें कितना वेतन दिया जाए उस पर सरकार उचित निर्णय ले। 39000₹ देने का
कोई ऑर्डर नहीं हुआ है।
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*6) जब ऐसी ही जनहित याचिका में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस इशू हुए तो
उत्साहित होकर IA फ़ाइल करके 68500 पर रोक की मांग की गयी साथ ही RTE
अम्मेण्डमेंट एक्ट 2017 के आधार पर रिलीफ की मांग की गयी।*
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7) इन दोनों IA पर कल 12.03.2018 को CJI की तीन जजेस की बेंच में सुनवाई
हुई जिसमें चंद्रचूड़ जी भी थे जहां इन मैटर्स को A K GOEL और U U LALIT जी
की बेंच में निर्णय लेने हेतु भेज दिया गया।
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*8) RTE अम्मेण्डमेंट एक्ट 2017 के द्वारा मार्च 2015 तक नियुक्त शिक्षकों
को 2019 तक अनिवार्य योग्यता हासिल करने को बोला गया है।* (NIOS द्वारा
कराया जा रहा डीएलएड उसी के अंतर्गत हो रहा है।)
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9) शिक्षामित्रो द्वारा दाखिल दोनों IA Devoid of Merit हैं और खारिज
होंगी। लेकिन इसके लिए बीटीसी को अपना वकील सुप्रीम कोर्ट में उतारना चाहिए
ताकि ये बेंच को गुमराह न कर पाएं। (बीटीसी नेता कृपया संज्ञान लें।)
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*10) बीटीसी को शिक्षामित्रों के समान कार्य समान वेतन से कोई आपत्ति नहीं
है इसलिए किसी भी याचिका में IMPLEAD नहीं किया, जब तक दो भर्तियां नहीं हो
जाती तब तक आप शिक्षामित्र हैं और जो कार्य कर रहे हैं उस अनुसार वेतन के
पात्र हैं।*
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~AG
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PS :- सरकार और अधिकारियों के अब तक के रवैये से यह दिख रहा है कि वे यह
चाहते हैं कि कोर्ट में भर्ती फंसी रहे और 2021 यानी अगले विधान सभा
चुनावों तक शिक्षामित्रों को शिक्षामित्र बनाये रखा जाए क्योंकि दो
भर्तियां होते ही उन्हें शिक्षामित्र के पद से हटाना होगा और कोई भी पार्टी
वोट बैंक को नाराज नहीं करना चाहती।
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