इलाहाबाद : यूपी बोर्ड प्रशासन लगातार नियमों व सुविधाओं में बदलाव करके
उसे आसान बनाने में जुटा है। इसी के तहत यूपी के पंजीकरण व अन्य सुविधाओं
में सॉफ्टवेयर के जरिये आमूलचूल परिवर्तन होने जा रहा है। इससे अफसरों के
साथ ही छात्र-छात्रओं को सहूलियत मिलेगी।
वहीं, पुराने रिकॉर्ड ऑनलाइन
अपलोड होने के बाद डुप्लीकेट प्रमाणपत्र का औचित्य ही खत्म हो जाएगा,
क्योंकि अभ्यर्थी पुराना प्रमाणपत्र खोने या नष्ट होने पर घर बैठे नया
प्रमाणपत्र डाउनलोड कर सकेंगे।
माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम तैयार कराने के साथ
ही लंबित सुविधाएं देने की दिशा में भी बढ़ रहा है। शासन ने पारदर्शी
व्यवस्था के तहत पिछले वर्षो के अंक व प्रमाणपत्र ऑनलाइन अपलोड करने का
निर्देश दिया था। इसकी समय सीमा निर्धारित हुई थी लेकिन, पहले निकाय चुनाव
की आचार संहिता के कारण और बाद में बोर्ड परीक्षा से कार्य पूरा नहीं हो
सका। 1अब शासन ने तय किया है कि डुप्लीकेट अंक या प्रमाणपत्र वेबसाइट पर
अपलोड न हो, क्योंकि उसका कोई औचित्य नहीं होगा। ऐसे ही इस तरह का
साफ्टवेयर बनाया जा रहा है, जिसमें पंजीकरण करने वाले छात्र-छात्रएं खुद
अपना रिकॉर्ड व दर्ज सूचनाएं देख भी सकेंगे। इससे परिणाम के बाद गलतियां
सुधारने से निजात मिलेगी। वहीं, जो पंजीकरण होंगे, उनका डाटा क्षेत्रीय
कार्यालय में जांच के बाद संबंधित जिलों में खुद अपलोड रहेगा। इसी तरह के
तमाम अन्य कार्य अमल में लाने का प्रयास है। अगले महीनों में पुराने अंक व
प्रमाणपत्र तेजी से अपलोड होंगे।
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