सर्वोच्च अदालत ने कहा कि एक बार सेवा नियमित होने के बाद कर्मचारी
ग्रेच्युटी का हकदार हो जाता है। इसके लिए उसकी पूर्व की सेवा भी गिनी
जाएगी। बशर्ते वह दिखा सके की उसने ग्रेच्युटी एक्ट की धारा 2 ए के अनुसार
बिना रुकावट के पांच साल सेवा की है।
यूपी सरकार को कड़ी फटकार : जस्टिस
अरुण मिश्र की पीठ ने यूपी सरकार को व्यर्थ के मुकदमे दायर नहीं करने का
निर्देश दिया। दरअसल, एक कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के लाभ देने के हाईकोर्ट
के आदेश के खिलाफ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। कोर्ट ने कहा,
हम देख रहे हैं ऐसे मामले कोर्ट में आ रहे हैं जिन्हें लड़ना बेहद मुश्किल
है।
नई दिल्ली विशेष संवाददातासर्वोच्च अदालत ने कहा कि एक बार सेवा नियमित
होने के बाद कर्मचारी ग्रेच्युटी का हकदार हो जाता है। इसके लिए उसकी पूर्व
की सेवा भी गिनी जाएगी। बशर्ते वह दिखा सके की उसने ग्रेच्युटी एक्ट की
धारा 2 ए के अनुसार बिना रुकावट के पांच साल सेवा की है। यूपी सरकार को
कड़ी फटकार : जस्टिस अरुण मिश्र की पीठ ने यूपी सरकार को व्यर्थ के मुकदमे
दायर नहीं करने का निर्देश दिया। दरअसल, एक कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के
लाभ देने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की
थी। कोर्ट ने कहा, हम देख रहे हैं ऐसे मामले कोर्ट में आ रहे हैं जिन्हें
लड़ना बेहद मुश्किल है।
ग्रेच्युटी कर्मचारी के वेतन का वह हिस्सा है, जो कंपनी या नियोक्ता,
कर्मचारी की वर्षो की सेवाओं के बदले उसे देता है। नौकरी छोड़ने या खत्म हो
जाने पर कर्मचारी यह रकम नियोक्ता की ओर से दी जाती है।
जो कर्मचारी एक ही कंपनी में लगातार 4 साल, 10 महीने, 11 दिन काम कर चुका
हो, उसकी सेवा को पांच साल की अनवरत सेवा माना जाता है। पांच साल की सेवाओं
के बाद ही कर्मचारी को ग्रेच्युटी मिलती है।
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