जागरण संवाददाता, मथुरा: निजी अंग्रेजी स्कूलों के बराबर अपने स्कूलों
को खड़ा करने की कोशिश कर रही बेसिक शिक्षा परिषद के पास अंग्रेजी में
पाठ्यक्रम पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं हैं। नगर क्षेत्र और विकासखंड स्तर
पर चयनित किए गए पांच-पांच स्कूलों में कुल 275 शिक्षकों की तैनाती की
जानी है, लेकिन बुधवार को काउंस¨लग में सिर्फ 86 शिक्षक ही कसौटी पर खरे
उतर सके।
बेसिक शिक्षा परिषद ने नगर क्षेत्र और प्रत्येक विकास खंड में
पांच-पांच प्राथमिक स्कूलों में अंग्रेजी पाठ्यक्रम को लागू कर दिया है।
इसके लिए स्कूलों का चयन कर लिया गया है। स्कूलों के चयन को लेकर बेसिक
शिक्षा के अधिकारियों ने पहले ही दौर में मानक को दरकिनार कर दिया था। इसके
पीछे अधिकारी राजनीतिक दबाव में आ गए थे। इसलिए मानकों के आधार पर स्कूलों
का चयन नहीं हो सका। इसके कारण ही अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में अपनी
तैनाती कराने से शिक्षकों ने अपने हाथ पीछे खींच लिए। इसके दुष्परिणाम
विभागीय अधिकारियों के सामने पहले ही दौर में सामने आ गए। एक विद्यालय में
पांच अध्यापकों की तैनाती होनी है। चयनित स्कूलों के लिए 275 शिक्षक विभाग
को चाहिए। जो प्राथमिक शिक्षा के अंग्रेजी पाठ्यक्रम को पूरा करके उसके
सार्थक परिणाम दे सके। ताकि अगले शैक्षिक सत्र की समाप्ति पर बेसिक शिक्षा
परिषद के अधिकारी निजी अंग्रेजी स्कूलों की बरबारी में अपने स्कूलों के खड़े
होने का दावा कर सकें। इसके लिए बुधवार को दोबारा शिक्षकों की काउंस¨लग भी
कराई गई। काउंस¨लग में 86 शिक्षकों का ही चयन हो पाया है। 189 शिक्षकों का
चयन नहीं हो सका। इनके चयन के बाद ही अंग्रेजी स्कूलों में मानक के अनुसार
शिक्षकों की तैनाती हो पाएगी, जो शैक्षिक सत्र के शुरू होने के तीन दिन
बाद तक नहीं हो सकी है। माना यह भी जा रहा है कि शिक्षक न होने के कारण
पहले ही चरण में बेसिक शिक्षा विभाग अंग्रेजी माध्यम में छात्रों को पढ़ाए
जाने के मोर्चें पर बुरी तरह से विफल हो गया है। इससे पहले 29 मार्च को
कराई गई काउंस¨लग को निरस्त कर दिया था। बीएसए संजीव कुमार ¨सह ने बताया
काउंस¨लग में 49 पुरुष और 37 महिलाएं शिक्षकों ने भाग लिया, जबकि चार
शिक्षक गैर हाजिर रहे।
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