अनिल कुमार वर्मा और अन्य की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि सहायक अध्यापकों की भर्ती हेतु टीईटी के अलावा एक और लिखित परीक्षा कराना अवैधानिक और औचित्यहीन है। याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की पीठ ने इस मामले को 9 अप्रैल को अन्य लंबित याचिकाओं के साथ सुनवाई हेतु प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
याची के अधिवक्ता ज्ञानेंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक 20 वें और 22 वें संशोधनों से केंद्रीय अधिनियमों का उल्लंघन हो रहा है। उनका कहना है कि नियमावली में किया गया संशोधन सुप्रीमकोर्ट के 25 जुलाई 2017 के आदेश का उल्लंघन है। सुप्रीमकोर्ट ने शिक्षा मित्रों को दो अवसर देने का आदेश दिया है। इसलिए इन दो भर्तियों को पूर्व की नियमावली के तहत ही कराना होगा। इसके बाद ही कोई नया नियम लागू किया जा सकता है।
अधिवक्ता का कहना है कि संशोधन सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद लाया गया है इसलिए इसका भूतलक्षी प्रभाव नहीं हो सकता है। मौजूदा समय में एक लाख 37 हजार भर्तियां रिकार्ड पर स्वीकृत हैं जबकि अर्हताधारी दावेदारों की संख्या इससे काफी कम है। इसलिए लिखित परीक्षा कराने का कोई आधार या औचित्य नहीं है। मामले की सुनवाई 9 अप्रैल को होगी।
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