एल॰टी॰ ग्रेड भर्ती मामले मे पुराने विज्ञापन पर भर्ती किए जाने की मांग
वाली याचिका खारिज हुई है । कोर्ट द्वारा दिये गए आदेश पर टिप्पणी उचित
नही है परंतु याचिका जिन ग्राउन्डस पर खारिज की गयी है वो पूरी तरह से सही
नही लगते हैं :-
1- सरकारी वकील ने तर्क दिया की उत्तर प्रदेश अधीनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित
शिक्षक ) सेवा नियमावली 1983 के चौथे संशोधन मे एकेडेमिक मेरिट से भर्ती
किए जाने का नियम है । इस मेरिट निर्धारण मे हाइ स्कूल और इंटर के अंकों को
मेरिट मे शामिल किया जाता है । वर्ष -2018 की बोर्ड परीक्षा मे नकल मे
सख्ती के चलते 11 लाख बच्चों ने परीक्षा छोड़ दी है । कोर्ट ने इस तर्क को
स्वीकार करते हुए लिखित परीक्षा को एकेडेमिक से अच्छा विकल्प माना है ।
2- उत्तर प्रदेश अधीनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित शिक्षक ) सेवा नियमावली 1983
मे 5वां संशोधन किया गया तथा चौथे संशोधन से शुरू हुई प्रक्रिया को खत्म
करते हुए 5 वें संशोधन मे लिखित परीक्षा का प्रावधान लाया गया । कोर्ट का
कहना है की लिखित परीक्षा अभ्यर्थी की योग्यता को ज़्यादा अच्छे से
प्रतिबिम्बित करती है इसलिए लिखित परीक्षा होना सही है ।
3- कोर्ट ने यह भी कहा है कि चूंकि 5 वें संशोधन को चुनौती ही नही दी गयी
थी और प्रक्रिया को रोकना, रद्द करना सरकार का नीतिगत मामला है इसलिए यह
याचिका खारिज की जाती है । (और भी बाते हैं जिनको पूरा लिखने पर पोस्ट बहुत
लंबी हो जाएगी )
जब भी मुझसे सवाल किया जाता था क्या 12460 को सरकार रद्द कर सकती है या
नियम बदल कर लिखित कर सकती है । मेरा एक ही जवाब रहता था कि "जब तक आरटीई
एक्ट-2009 " है भर्ती का बाल भी बांका नही हो सकता है । एल॰टी॰ ग्रेड मे भी
बिलकुल वही केस था वही अशोक खरे साहब थे वही ओझा जी थे वही एम डी सिंह
शेखर जी थे मगर यहा आदेश उल्टा है क्यूकी एल॰टी॰ ग्रेड भर्ती कि हिफाजत
आरटीई एक्ट-2009 नही कर रहा है । सुप्रीम कोर्ट से भी एकेडेमिक भर्ती बचने
कि एक बड़ी वजह ये थी कि आरटीई एक्ट-2009 उन भर्तियों कि हिफाज़त कर रहा था ।
एल॰टी॰ ग्रेड भर्ती पुराने विज्ञापन समर्थकों को डबल बेंच मे किस्मत ज़रूर
आजमानी चाहिए ।
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