इलाहाबाद : योगी सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल में भर्ती आयोगों का हो
गया है लेकिन, शिक्षा महकमे में अफसरों की खोज पूरी नहीं हो पाई है।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक को तीन माह का सेवा विस्तार भी इसी माह खत्म हो रहा
है। इसके अलावा बेसिक व माध्यमिक शिक्षा में निदेशक, अपर निदेशक और मंडलीय
संयुक्त शिक्षा निदेशकों के पद खाली पड़े हैं।
पदोन्नति और नियमित अफसरों
के चयन पर जोर न होने का असर कामकाज पर पड़ना तय है। 1प्रदेश सरकार कामकाज
में पारदर्शिता और उनका समयबद्ध निस्तारण पर खास जोर दे रही है लेकिन, जिन
अफसरों को यह अमल में लाना है, उनकी नियुक्ति पर शासन गंभीर नहीं है। यही
वजह है कि लंबे समय से खाली चल रहे पदों पर अब तक नियमित नियुक्ति नहीं हो
सकी है। शिक्षा निदेशक बेसिक दिनेश बाबू शर्मा 28 फरवरी 2016 को
सेवानिवृत्त हुए, तब तत्कालीन बेसिक शिक्षा सचिव अजय कुमार सिंह के पास
इसका प्रभार रहा। बाद में एससीईआरटी के निदेशक डा. सर्वेद्र विक्रम बहादुर
सिंह को प्रभार सौंपा गया, जो बरकरार है। ऐसे ही माध्यमिक शिक्षा निदेशक
डा. अवध नरेश शर्मा जनवरी 2018 में सेवानिवृत्त हुए, बोर्ड परीक्षाओं को
देखते हुए उन्हें तीन माह का सेवा विस्तार दिया। यह कार्यकाल 30 अप्रैल को
पूरा हो रहा है। अब निदेशक के दो पद रिक्त हैं। माध्यमिक शिक्षा के अपर
निदेशक रमेश के सेवानिवृत्त होने के बाद प्रभार बेसिक शिक्षा के अपर निदेशक
विनय कुमार पांडेय को मिला। वह दोनों पदों पर कार्य करते रहे, बाद में वह
बर्खास्त हो गए। अब अपर निदेशक बेसिक व माध्यमिक शिक्षा का कार्य अतिरिक्त
प्रभार के रूप में देकर काम चलाया जा रहा है।
यूपी बोर्ड की सचिव शैल यादव की जगह नीना श्रीवास्तव को जिम्मा दिया गया।
उसी बीच माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की सचिव रूबी सिंह की नियुक्ति अपर
निदेशक बेसिक शिक्षा कैंप कार्यालय में हो गई, उसके बाद से नीना को चयन
बोर्ड सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। शिक्षा निदेशालय में अपर निदेशक
महिला शैल यादव के सेवानिवृत्त होने के बाद से पद खाली पड़ा है। निदेशक
पत्रचार सतत शिक्षा संस्थान, अपर निदेशक उच्च शिक्षा संस्थान, अपर निदेशक
सीमैट, प्राचार्य राज्य शिक्षा संस्थान जैसे पद कार्यवाहकों के जिम्मे हैं।
ऐसे ही जेडी पदों का भी कार्यभार दूसरे अफसरों को दिया गया है।
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